पावर कारपोरेशन में भ्रष्टाचार चरम सीमा परः बिना केबल और पाइप डाले ही कार्यदायी फर्म को कर दिया 2.63 करोड़ का भुगतान

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन द्वारा जनता की सुरक्षा को लेकर की गई लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में कई जगहों पर केबल ही नहीं डाली गई, और फर्म को 2.63 करोड़ का भुगतान कर दिया।

बरेली। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन द्वारा जनता की सुरक्षा को लेकर की गई लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में कई जगहों पर केबल ही नहीं डाली गई, और सुरक्षा के लिए आवश्यक पाइप भी नहीं बिछाई गई। इसके बावजूद, 2.63 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है।

2020 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
जनता की सुरक्षा को लेकर बिजली निगम लापरवाह है। ऐसा ही देखने में आया। करोड़ों के बड़े काम में बीच-बीच में केबल बिछाई ही नहीं गई। साथ ही केबल के ऊपर सुरक्षा को डाली जाने वाली पाइप भी नहीं पड़ी और इस काम का 2.63 करोड़ का भुगतान भी कर दिया गया। मामला 2020 में दोहना बिजलीघर से एक वैकल्पिक भूमिगत 33 केवी की डबल सर्किट अंडरग्राउंड बिजली की केबल एयरफोर्स स्टेशन त्रिशूल तक डालने का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था। एयरफोर्स ने यह कार्य बिजली निगम से कराया था। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने करीब 14 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत बनाकर उसका पत्र दिया था। इसका भुगतान भी हो गया। पावर कारपोरेशन ने लेबर और छोटे कार्यों के लिए पांच करोड़ का टेंडर निकाल 2.74 करोड़ रुपये में आगरा की अंजनी ट्रांसफार्मर एंड स्विचगियर्स फर्म को काम दिया। हवाहवाई कार्य करने पर फर्म को ढाई करोड़ का भुगतान कर दिया गया। बताया जाता है एयरफोर्स सिस्टम बिजली पर काफी निर्भर रहता है। इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था पहले से है, लेकिन तीसरी वैकल्पिक व्यवस्था भूमिगत लाइन द्वारा होनी थी।

उपखण्ड अधिकारी और अवर अभियन्ता ने की लापरवाही
प्रोजेक्ट की देखरेख तत्कालीन उपखण्ड अधिकारी पारस रस्तोगी और अवर अभियंता आलोक प्रजापति के जिम्मे थी। लेकिन निरीक्षण और गुणवत्ता जांच में अनदेखी के कारण आगरा की कंपनी अंजनी ट्रांसफार्मर और स्विच गियर को ठेका दिया गया, जिसने काम में अनियमितताएं कीं। कई स्थानों पर केबल नहीं बिछाई गई, जबकि अन्य जगहों पर सुरक्षा पाइप भी गायब थे। इसके अलावा, कई जगह डबल सर्किट लाइन को सिंगल सर्किट में बदल दिया गया या बिल्कुल भी नहीं डाली गई।

अनियमितताओं के बावजूद 2.63 करोड़ का भुगतान
इसके बावजूद, ठेकेदार फर्म को 2.63 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि 10 लाख रुपये का भुगतान अब भी लंबित है। इस बीच, प्रोजेक्ट का काम अभी अधूरा है। मामले के खुलने के बाद संबंधित अधिकारी अब इसे दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला गंभीर है और दोषियों के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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