अवर अभियन्ता सौरभ कुशवाहा का स्वरचित विद्युत आपूर्ति संहिता अधिनियम…. जिसके अनुसार दिये जा सकते है सौ मीटर से अधिक दूरी का बिजली कनेक्शन

लखनऊ। प्रधानमंत्री की अति महत्वाकांक्षी सौभाग्य योजना से हर घर को रोशन करने के मामले कब का इतिश्री हो चुका हैं, लेकिन उसके स्थान पर चर्चित अवर अभियन्ता सौरभ कुशवाहा का स्वरचित विद्युत आपूर्ति संहिता अधिनियम…. जिसके अनुसार दिये जा सकते है सौ मीटर से अधिक दूरी का बिजली कनेक्शन, जिसके जहत खुलेआम खंभे से डेढ़ सौ से दो सौ मीटर तक लंबी केबल जोड़ कर सुगामऊ उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है…..

हैरानी का विषय यह है कि इन सभी का मीटर ट्रासंफार्मर की सुरक्षा में लगे जाली में ठोक दिया जा रहा है, जिससे मीटर ट्रासंफार्मर की सुरक्षा में लगे जाली में लगे होन व केबल लंबी होने से हादसे की संभावना भी बनी हुई है।

उपरोक्त मामला मध्यांचल विधुत वितरण निगम अन्तगर्त गोमती नगर जोन, लेसा अधीनस्थ सुगामऊ पावर हाउस, मुंशीपुलिया डिविजन क्षेत्र का है। इन्दिरा नगर स्थित चांदन निकट महावीर नगर का है, जहां स्थित एक झुग्गी झोपड़ी का है, जहां कई अलग- अलग नाम से बिना ऊर्जाकृत किये बिजली कनेक्शन कर इन सभी का मीटर ट्रासंफार्मर की सुरक्षा में लगे जाली में ठोक लगा दिया गया।

आसपास कोई खंभा न होने से इन घरों में उल्टे सीधे तरीके से बांस-बल्ली के सहारे, किसी के खेत के ऊपर से ले जाते हुए लगभग 170 मीटर दूर खंभे से तार खींच कर कन्नेक्शन दे दिया गया। डर यह भी है कि बरसात के दिनों में किसी कारण मीटर ट्रासंफार्मर की सुरक्षा में लगे जाली में करंट प्रभाव हो जाने से तार टूट कर गिरा तो हादसा हो सकता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

कनेक्शन के लिए हैं चालीस मीटर का मानक
घरों में कनेक्शन देने के लिए घर से अधिकतम 40 मीटर की दूरी पर विद्युत पोल होने की शर्त है। दूरी अधिक होने पर स्टीमेट बनवाकर उपभोक्ता को खंभा लगवाने का खर्च जमा करना पड़ता है। लेकिन चर्चित अवर अभियन्ता सौरभ कुशवाहा ने खुद का विद्युत आपूर्ति संहिता बना रखा है, जिसके तहत इस प्रकार के आधारण कार्य साधारण तरीके से करते है, ताकि स्वयं के साथ-साथ अपने अधिकारीयों एवं आवेदकों के लिए सुविधा जनक हो। भले ही स्वयं रचित विद्युत आपूर्ति संहिता से विभाग को राजस्व का हानि हो।

चर्चित अवर अभियन्ता सौरभ कुशवाहा के कारनामों पर क्या कहते हैं उच्च अधिकारी
चर्चित अवर अभियन्ता सौरभ कुशवाहा के कारनामों का एक नमूना यूपीपीसीएल माडिया द्वारा मुख्य अभियन्ता- गोमती नगर जोन, लेसा, अधिक्षण अभियन्ता- इन्दिरा नगर व अधिशासी अभियन्ता- मुंशीपुलिया डिविजन को व्हाट्सप्प के माध्यम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उक्त सभी अधिकारीयों का पक्ष नहीं प्राप्त हुआ है… जैसे किसी अधिकारी का पक्ष प्राप्त होता है, उनका पक्ष जरूर रखा जायेगा।

 

पहले भी इस प्रकार का लग चुका है आरोप … क्या उच्च अधिकारीयों का है संरक्षण?
भी हाल में ही 1 अगस्त 2024 को यूपीपीसीएल मीडिया द्वारा एक खबर प्रकाशित की गई “ जिसमें “जेई, एसडीओ की मिली भगत से बिजली की चोरी की रोशनी में राम कथा कर कर पुण्य प्राप्त करने का प्रयास“ नामक शीर्षक से कर प्रकाशित की गई थी, जिसको लेकर पूरे प्रदेश में बिजली विभाग की जमकर किरकिरी हुई थी….. इसके साथ ही इसके पूर्व ट्रांसफार्मर का लोड बढ़ाने के लिए प्रति व्यक्ति 50000 रुपये की दर से रिश्वत मांगने के मामले के प्रकरण में सुगांमऊ अवर अभियन्ता सौरभ कुशवाहा की होगी जॉच …. नामक शीर्ष से खबर प्रकाशित की गई थी, जिसको लेकर मध्यांचल विधुत वितरण निगम द्वारा मुख्य अभियन्ता- गोमती नगर जोन, लेसा को जॉच कर अवगत कराने का आदेश दिया था…. लेकिन दो माह से अधिक समय व्यतीत होने के बाद भी कोई जॉच नहीं प्रारम्भ हुई… इससे साफ प्रतीत होता है कि उच्च अधिकारीयों का भरपूर्ण संरक्षण प्राप्त है।

  • UPPCL MEDIA

    "यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

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