₹6016 प्रति कनेक्शन की अवैध वसूली पकड़ी गई – आयोग का आदेश, उपभोक्ताओं को लौटाने होंगे लगभग ₹127 करोड़

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर करोड़ों की वसूली का खेल!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन जारी करते समय स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के खेल का पर्दाफाश हो गया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर नए विद्युत कनेक्शनों से की जा रही अवैध वसूली पर विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं से लिए गए ₹6016 प्रति कनेक्शन की अतिरिक्त राशि अवैध है और इसे वापस किया जाना अनिवार्य होगा।

आयोग के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजन के माध्यम से लगभग 127 करोड़ रुपये वापस किए जाएंगे। मामला तब उजागर हुआ जब उपभोक्ताओं से ₹6016 प्रति कनेक्शन की अतिरिक्त वसूली की शिकायतें सामने आईं। इस पर सुनवाई करते हुए विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है।

आयोग ने साफ कहा है कि यह वसूली नियमों के अनुरूप नहीं थी, इसलिए उपभोक्ताओं से ली गई रकम वापस की जाएगी।

1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पैसा लौटाने का सिलसिला

आयोग के आदेश के अनुसार

  • उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि

  • बिजली बिलों में समायोजन के माध्यम से वापस की जाएगी

  • यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी

  • कुल मिलाकर लगभग ₹127 करोड़ उपभोक्ताओं को लौटाने होंगे

आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था यह खेल?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब यह वसूली नियामक आयोग की स्वीकृति के बिना हो रही थी, तो:

  • विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?

  • इतने बड़े पैमाने पर वसूली कैसे जारी रही?

  • क्या यह सब केवल सिस्टम की गलती थी या फिर किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त था?

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते मामला आयोग तक नहीं पहुंचता, तो यह रकम सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकती थी।

उपभोक्ताओं से वसूली, जिम्मेदार कौन?

इस पूरे प्रकरण ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ उपभोक्ताओं से ₹6016 की अतिरिक्त वसूली की जाती रही, दूसरी तरफ अब वही पैसा बिजली बिलों में समायोजन करके लौटाने का आदेश दिया गया है।

लेकिन बड़ा सवाल अभी भी कायम है—

क्या करोड़ों रुपये की इस अवैध वसूली के लिए किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी? या फिर यह मामला केवल कागजों में समायोजन तक ही सीमित रह जाएगा?


(यूपीपीसीएल मीडिया)

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