न्‍यायालय मे बिजली चोरी का केस 17 साल चलने के बाद एक साल करावास व जुर्माना की सुनाई सजा 

मैनपुरी। स्पेशल जज विधुत अधिनियम एक्ट न्यायालय में रतनपुर बरा के तहसीलदार का केस 17 साल चलने के बाद बिना विधुत कनेक्शन के आटा चक्की चलाने के मामले मे न्यायधीश जय प्रकाश ने एक साल की सजा व जुर्माना का आदेश किया।

उपरोक्त घटना लगभग 17 साल से पहले 23 जनवरी 2007 की है, जब मुलायम सिंह अवर अभियंता, मनोज जैन उपखण्ड अधिकारी एवं जगतपाल लाइनमैन के साथ थाना एलाऊ के रतनपुर बार में तहसीलदार पुत्र कालीचरन के यहां पर विद्युत चेकिंग की मौके पर विद्युत की एलटी लाइन पर डायरेक्ट कटिया डालकर 5 एचपी की विद्युत मोटर से अवैध रूप से आटा चक्की का संचालन कर रहा था, विद्युत चेकिंग टीम ने विद्युत कनेक्शन आटा चक्की के कागजात मांगे, किंतु उसने मौके पर नहीं दिखाए। मौके पर उसके यहां से 103 हाथ तीन कोर की काली केवल मौके पर जब्त की गई थी, विद्युत कनेक्शन की कोई कागज ना दिखाने पर मुलायम सिंह ने तहसीलदार के विरुद्ध विद्युत अधिनियम की धारा 135 में थाना ऐलाऊ में मुकदमा पंजीकृत कराया।

पुलिस विवेचना के बाद आरोप पत्र तहसीलदार के विरुद्ध स्पेशल जज ई सी एक्ट न्यायालय में पेश किया गया अभियोजन की तरफ से वादी मुलायम सिंह तथा जगतपाल जेई के द्वारा जब्त की गई केविल को न्यायालय में साबित किया गया। किशन लाल कांसटेबिल द्वारा रामेश्वर सिंह सिसोदिया विवेचक एवं बृजकिशोर द्वारा फिर लेखक को आयोजन द्वारा प्रमाणित कराई गई।

शासकीय अधिवक्ता विश्वजीत राठौर व विद्युत विभाग की अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कटारिया ने विद्युत विभाग की तरफ से पक्ष रखा। विद्युत विभाग अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में बताया गया कि तहसीलदार घटना के समय बिना विद्युत कनेक्शन के अवैध से आटा चक्की चलाते हुए मौके पर पाया गया था। उसने कोई विद्युत कनेक्शन के न्यायालय में दिखाएं न विधुत टीम को दिखाए गए थे, तहसीलदार द्वारा विधुत विभाग को लाखों रुपए की राजस्व की हानि की है। कड़ी सजा की न्यायालय से मांग की गई अभियुक्त के अधिवक्ता ने कम से कम सजा की माँग की न्यायाधीश स्पेशल ईसी एक्ट जयप्रकाश द्वारा बहस सुनने के बाद तहसीलदार को बिजली चोरी के अपराध का दोषी माना और उसे एक साल कारावास की सजा सुनाई और 15000 रुपए जुर्माना का आदेश किया। जुर्माना जमा न करने पर एक माह का कारावास की सजा सुनाई।

एक अन्य प्रकरण में तहसीलदार को दिनांक 22 अप्रैल 2008 को विद्युत प्रवर्तन दल फिरोजाबाद के सुमित गर्ग अवर अभियन्ता राजेंद्र सिंह, उपनिरीक्षक श्याम सिंह की टीम द्वारा तहसीलदार पुत्र कालीचरण को विद्युत की एलटी लाइन पर केवल डालकर आटा चक्की चलाते हुए मौके पर पाया था। विद्युत पप्रवर्तन दल की टीम द्वारा मौके पर चक्की में गल्ला डाला हुआ था। मौके पर 7:30 एचपी की मोटर से आटा चक्की चला रहा था। तहसीलदार के यहां से 7 मीटर की विद्युत केबल जप्त की गई और थाना ऐलाऊ में विद्युत चोरी की धारा 135 में पंजीकरण कराया गया।

पुलिस विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश हुआ अभियोजन की तरफ से पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह, सुमित गर्ग अवर अभियन्ता, रामेश्वर सिसोदिया विवेचक़ किशन लाल द्वारा अभियान की तरफ से शासकीय अधिवक्ता विश्वजीत राठौर और विद्युत विभाग की तरफ से देवेंद्र सिंह कटारिया द्वार पक्ष रखा। विद्युत विभाग के अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कटारिया द्वारा न्यायालय में बताया कि तहसीलदार के विरुद्ध बिजली चोरी का अपराध की धारा 135 पूर्ण रूप से साबित किया गया। तहसीलदार बिना विद्युत कनेक्शन के आटा चक्की के कोई पेपर नहीं दिखाए गए, बिना कनेक्शन के आटा चक्की चला रहा था । विद्युत प्रवर्तन दल द्वारा मौके पर चक्की में गल्ला डाला हुआ था। तहसीलदार पूर्व में भी 23 जनवरी 2007 को आटा चक्की चला रहा है इसलिए यह आटा चक्की का रिपीटर अपराधी है और आदतन अब दूसरी बार विद्युत की चोरी करता है और विद्युत विभाग को लाखों रुपए का राजस्व को नुकसान करता है। तहसीलदार के विरुद्ध अभियोजन केस पूर्ण साबित करने में सफल राय तहसीलदार का अधिक से अधिक सजा की मांग की, जिस पर न्यायाधीश स्पेशल जज विधुत अधिनियम एक्ट जयप्रकाश द्वारा तहसीलदार को विद्युत चोरी के अपराध में दोषी मानते हुए एक साल के कारावास की सजा दी तथा रूपया 30000 अर्थदण्ड का आदेश किया। अर्थदण्ड न जमा करने की स्थिति में दो माह का कारावास की सजा सुनाई। तहसीलदार द्वारा आपने अधिवक्ता से 389 सीआरपीसी का प्रार्थना पत्र उच्च न्यायलय मे अपील दाखिल करने का समय माँगा, जिस न्यायाधीश ने 30 दिन का समय देते हुये रूपया 50000 के व्यक्तिग्य बंधपत्र व इसी राशि की दो जमानती प्रस्तुत करने पर रिहा किया।

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