पावर कॉरपोरेशन में आदेश बनाम आदेश — क्या डिस्कॉम एमडी को है अध्यक्ष के फैसले को पलटने का अधिकार?

🔴 पावर कॉरपोरेशन में आदेश बनाम आदेश- क्या अब चेयरमैन भी बेबस हो गए हैं?

➡️ क्या अब डिस्कॉम एमडी, पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन से ऊपर हो गई हैं?
➡️ क्या चेयरमैन का आदेश सिर्फ “सुझाव” बनकर रह गया है?

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में एक ऐसा प्रशासनिक फैसला सामने आया है, जिसने पूरी बिजली व्यवस्था में अभूतपूर्व हलचल मचा दी है। मामला सिर्फ एक अधिकारी के प्रमोशन का नहीं, बल्कि अधिकार, पदानुक्रम और संवैधानिक मर्यादा का है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में इन दिनों जो हो रहा है, वह सिर्फ एक अधिकारी के प्रमोशन का मामला नहीं रहा — यह अब पूरे सिस्टम की सत्ता, अधिकार और अनुशासन की खुली जंग बन चुका है।

एक तरफ UPPCL चेयरमैन का आदेश, दूसरी तरफ डिस्कॉम एमडी का पलटवार … और बीच में सवालों के घेरे में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था।

चेयरमैन का आदेश… और फिर एमडी का ‘रीवर्स गियर’

बृजेश कुमार सिंह वर्तमान में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत थे और सीतापुर क्षेत्र के अतिरिक्त प्रभार के रूप में मुख्य अभियंता की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष महोदय द्वारा उन्हें मुख्य अभियंता (स्तर-2) के पद पर पदोन्नत करते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड मुख्यालय में तैनाती प्रदान की गई।

प्रमोशन पर चला ‘रीवर्स गियर’

लेकिन यहीं से शुरू हुआ असली विवाद … इससे पहले कि स्याही सूखती, डिस्कॉम एमडी ने आदेश को ही रद्द कर दिया। न प्रमोशन माना गया, न पद स्वीकार किया गया, और अधिकारी को दोबारा अधीक्षण अभियंता बताकर अटैच कर दिया गया।

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशिका रिया केजरीवाल ने न सिर्फ इस प्रमोशन को रद्द कर दिया, बल्कि बृजेश कुमार सिंह को दोबारा अधीक्षण अभियंता के पद पर मध्यांचल मुख्यालय से अटैच कर दिया।

सबसे बड़ा सवाल

➡️ क्या किसी एक डिस्कॉम की प्रबंध निदेशिका को यह अधिकार है कि वह पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा किए गए प्रमोशन को रद्द कर दे?
➡️ अगर हां, तो फिर कॉरपोरेशन अध्यक्ष की संवैधानिक और प्रशासनिक भूमिका का क्या अर्थ रह जाता है?
➡️ और अगर नहीं, तो क्या यह फैसला अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आता?

यह सिर्फ अवहेलना नहीं, सत्ता का खुला प्रदर्शन है

यह कोई साधारण प्रशासनिक गलती नहीं है।
यह है —

⚠️ आदेश की अवमानना
⚠️ अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण
⚠️ चेयरमैन की संवैधानिक हैसियत को खुली चुनौती

अगर डिस्कॉम स्तर पर चेयरमैन का आदेश रद्द किया जा सकता है, तो फिर पावर कॉरपोरेशन का मुखिया सिर्फ नाम का रह गया है?

सिस्टम पर सवाल, साख पर असर

इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि पावर कॉरपोरेशन के भीतर आदेशों की स्पष्ट श्रृंखला (Chain of Command) गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी है। आज सवाल बृजेश कुमार सिंह का है, कल किसी और अधिकारी का होगा — और परसों पूरा सिस्टम अस्थिरता का शिकार हो सकता है।

सिस्टम में मचा भूचाल

आज बृजेश कुमार सिंह, कल कोई और अधिकारी, और परसों पूरा तंत्र। अगर हर डिस्कॉम अपने नियम चलाएगा तो पावर कॉरपोरेशन नहीं, चार अलग-अलग सत्ता केंद्र बन जाएंगे।

यूपीपीसीएल मीडिया का सीधा सवाल

🔴 अगर अध्यक्ष के आदेश को डिस्कॉम स्तर पर पलटा जा सकता है, तो पावर कॉरपोरेशन चल कौन रहा है- चेयरमैन या डिस्कॉम एमडी?
🔴 क्या यह प्रशासनिक अनुशासन है या व्यक्तिगत शक्ति प्रदर्शन?
🔴

यह मामला अब सिर्फ एक फाइल नहीं, बल्कि पूरे पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता की कसौटी बन चुका है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि पावर कॉरपोरेशन नेतृत्व इस चुनौती पर क्या रुख अपनाता है।

— यूपीपीसीएल मीडिया

  • UPPCL MEDIA

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