सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल-बिना अफसर—बिना आदेश—खुद बन बैठे ‘चेकिंग अधिकारी’

🔥 मेंटेनेंस की आड़ में गोमती नगर जोन में संविदा कर्मियों का गैंग ‘सिंदिकेट राज’! 🔥

लखनऊ | गोमती नगर जोन

मध्यांचल डिस्कॉम अंतर्गत गोमती नगर जोन में संविदा कर्मियों की कार्यप्रणाली को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था अब खुद अपने ही उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों के मुताबिक,गोमती नगर जोन अंतर्गत मेंटेनेंस के नाम पर संविदा कर्मियों का एक खुद का गैंग क्षेत्र में सक्रिय है, जो न तो किसी अधिकारी के साथ चलता है और न ही किसी लिखित आदेश के तहत। बिजली चोरी दिखाई देने पर न तो यह गैंग अधिकारियों को सूचना देता है और न ही नियमानुसार टीम बुलाता है—बल्कि खुद ही चेकिंग कर डालता है।

चौंकाने वाला मामला सामने आया अमराई गांव पावर हाउस से, न सिर्फ  है, बल्कि विभागीय नियंत्रण, जवाबदेही और ईमानदारी पर सीधा तमाचा है। गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मेंटेनेंस के लिए तैनात संविदा कर्मी अब अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर बिजली चोरी की चेकिंग जैसे अधिकारहीन कार्य करते नजर आ रहे हैं, जिससे राजधानी लखनऊ में लागू वर्टिकल व्यवस्था की साख पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

जानकारी के अनुसार, अमराई गांव पावर हाउस क्षेत्र में सुबह 7 से 10 बजे के बीच केवल दो शिकायतें दर्ज थीं—एक मुर्गी फार्म तथा दूसरी वासुदेव डिग्री कॉलेज से संबंधित। इसके बावजूद पावर हाउस से लगभग 6 से 7 संविदा कर्मियों की टीम क्षेत्र में निकल पड़ी और शिकायत स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर एक विकसित कॉलोनी में पहुंचकर स्वयं ही चेकिंग कर डाली। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस दौरान उनके साथ कोई भी अधिकृत अधिकारी मौजूद नहीं था।

सूत्रों के मुताबिक, चेकिंग के दौरान मौके से तार भी उखाड़ कर लाए गए, लेकिन लगभग तीन घंटे तक इसकी कोई सूचना संबंधित अधिकारियों को नहीं दी गई। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब लखनऊ में वर्टिकल प्रणाली के तहत हर कार्य के लिए अलग-अलग अधिकृत टीमें एवं जिम्मेदार अधिकारी निर्धारित किए गए हैं।

इस कथित चेकिंग के बाद एक उपभोक्ता से ₹6000 लिए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि यूपीपीसीएल मीडिया इस आरोप की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह आरोप अपने आप में विभागीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शिकायत कुछ… ‘छापा’ कहीं और …. जानकारी के अनुसार, अमराई गांव पावर हाउस से सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच सिर्फ दो शिकायतें दर्ज थीं— एक मुर्गी फार्म से, दूसरी वासुदेव डिग्री कॉलेज से, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पावर हाउस से 6–7 संविदा कर्मियों की टीम शिकायत स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर एक विकसित कॉलोनी में जा पहुंचती है और बिना किसी उच्च अधिकारी की मौजूदगी या आदेश के खुद ही चेकिंग कर डालती है।
मौके से तार उखाड़ कर ले आए जाते हैं और करीब तीन घंटे तक किसी भी अधिकारी को सूचना नहीं दी जाती।

₹6000 की ‘वसूली’ का आरोप

सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि इस कथित चेकिंग के बाद एक उपभोक्ता से ₹6000 लिए जाने का आरोप है। हालांकि यूपीपीसीएल मीडिया इसकी पुष्टि नहीं करता—लेकिन इतना बड़ा आरोप खुद में सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल है।

जब इस मामले में अधीक्षण अभियंता (टेक्निकल), अधिशासी अभियंता 11 केवीए अभय प्रताप सिंह तथा अवर अभियंता 11 केवीए दिनेश सिंह—जो वर्तमान में अमराई गांव पावर हाउस का कार्यभार भी देख रहे हैं—से संपर्क किया गया, तो सभी ने किसी भी प्रकार की चोरी संबंधी सूचना प्राप्त होने से इनकार किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मेंटेनेंस टीम को बिजली चोरी पकड़ने या चेकिंग करने का कोई अधिकार नहीं है और उनका कार्य केवल आपूर्ति के रखरखाव तक सीमित है।

मौके पर चेकिंग करने वाली टीम में ऋषभ, रंजीत, शिवराज सिंह चौहान उर्फ पिंटू, प्रमोद, अंकित, सुजीत सिंह चौहान, विजय विक्रम और अमन के नाम सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि टीजी-2 मुकेश मौर्य द्वारा बिजली चोरी की सूचना दिए जाने की बात कही जा रही है।

पूरे प्रकरण ने वर्टिकल व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अधिकारविहीन कर्मी अपने स्तर पर चेकिंग जैसे संवेदनशील कार्य करने लगें और अधिकारियों को इसकी जानकारी तक न हो, तो यह न केवल व्यवस्था की विफलता दर्शाता है बल्कि भविष्य में गंभीर प्रशासनिक और कानूनी समस्याओं का संकेत भी देता है।

यूपीपीसीएल मीडिया ने गोमती नगर जोन के मुख्य अभियंता से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संविदा कर्मियों को इस प्रकार की गतिविधियों की छूट किसके आदेश से दी गई और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई कब की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल — मुख्य अभियंता से

यूपीपीसीएल मीडिया गोमती नगर जोन के मुख्य अभियंता से सीधा सवाल पूछता है—

❓ संविदा कर्मियों को बिना आदेश, बिना अधिकारी, बिना अधिकार चेकिंग करने की छूट किसने दी?
❓ क्या वर्टिकल व्यवस्था का मतलब यह है कि हर संविदा कर्मी खुद कानून बन जाए?
❓ अगर यह सब आपकी जानकारी में नहीं था, तो फिर नियंत्रण किसके हाथ में है?
❓ और अगर जानकारी में था, तो जिम्मेदारी कब तय होगी?

वर्टिकल व्यवस्था कटघरे में

यह पूरा मामला साफ बताता है कि वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर संविदा कर्मियों की खुली छूट, अफसरों की अनदेखी, और सिस्टम की लचर पकड़ अब जनता और विभाग—दोनों के लिए खतरा बन चुकी है।

यूपीपीसीएल मीडिया चेतावनी देता है—
अगर समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो यह ‘मेंटेनेंस गैंग’ कल को पूरे सिस्टम को बंधक बना लेगा।

— यूपीपीसीएल मीडिया

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