“सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी?” — UPPCL के स्थानांतरणों पर गंभीर सवाल

“Supreme Court Order Ignored?” — Transfer Letters Cite Order, Yet Alleged Violations Spark PIL Move

उत्तर प्रदेश में विद्युत निगमों में हो रहे स्थानांतरण को लेकर हमेशा विवाद बना रहता है। आरोप रहता है कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा किए ट्रांसफर आदेश सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत हैं, जबकि उन्हीं आदेशों का हवाला ट्रांसफर पत्रों में दिया जा रहा है।

मामला उस ऐतिहासिक आदेश से जुड़ा है, जो Supreme Court of India ने Suresh Chandra Sharma vs Chairman, UPSEB & Ors. (24 फरवरी 2005) में पारित किया था। इस आदेश में विद्युत निगमों में अधिकारियों/कर्मचारियों के स्थानांतरण को राजनीतिक/प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी समिति (Independent Monitoring Committee) के माध्यम से ट्रांसफर प्रक्रिया कराने के सख्त निर्देश दिए गए थे।

आदेश का मूल सार

  • कोई भी मंत्री या सरकारी अधिकारी ट्रांसफर/पोस्टिंग में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
  • सभी ट्रांसफर एक स्वतंत्र समिति की निगरानी में होंगे।
  • समिति की स्वीकृति के बिना कोई स्थानांतरण मान्य नहीं होगा।

आरोप क्या हैं?

पावर कॉरपोरेशन द्वारा कुछ सालो से किए जा रहे स्थानांतरण आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश का उल्लेख किया गया, लेकिन:

  • न तो स्वतंत्र समिति की स्वीकृति ली गई,
  • न ही पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया,
  • और न ही आदेश की भावना के अनुरूप कार्यवाही की गई।

यही नहीं, आरोप यह भी है कि आदेश का हवाला देकर कर्मचारियों और अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत हो कि ट्रांसफर पूरी तरह न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है। लेकिन हकीकत तो यह है कि आदेश का हवाला देकर कर्मचारियों और अधिकारियों को गुमराह नहीं किया जा रहा है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया जा रहा है।

जनहित (PIL) याचिका की तैयारी

पावर कॉरपोरेशन द्वारा किए ट्रांसफर आदेश सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर किये गये स्थानांतरण आदेश को लेकर, इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश पावर कंप्लेंट लखनऊ- मीडिया (UPPCL MEDIA), Lucknow द्वारा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। याचिका में मांग की जा रही है कि:

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की जांच हो,
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही हो,
  • और ट्रांसफर प्रक्रिया को न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।

बड़ा सवाल

क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश का केवल हवाला दिया जा रहा है, पालन नहीं? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल न्यायालय की अवमानना का विषय है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।

मामला अब न्यायिक दहलीज़ पर जाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की विद्युत व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

उत्तर प्रदेश के विद्युत निगमों में हालिया स्थानांतरण आदेशों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप हैं कि स्थानांतरण आदेश सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत जारी किए गए, जबकि उन्हीं आदेशों का हवाला ट्रांसफर पत्रों में दिया जा रहा है।

  • UPPCL MEDIA

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