न्यू कनेक्शन के नाम पर उपभोक्ता की जेब पर डाका
लखनऊ। प्रदेश में नया बिजली कनेक्शन लेना अब आम उपभोक्ता के लिए पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है। नई कॉस्ट डेटा बुक-2026 के बाद प्रीपेड मीटर आधारित कनेक्शन दरों ने सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाला है। जो 1 किलोवाट कनेक्शन पहले लगभग ₹1800 और 2 किलोवाट ₹2200 में मिल जाता था, वही अब ₹4225 से ₹5155 तक पहुँच गया है। इसमें करीब ₹2800 केवल मीटर के नाम पर जोड़े जा रहे हैं।
प्रोसेसिंग फीस में चौगुनी बढ़ोतरी
पहले 1 किलोवाट तक प्रोसेसिंग चार्ज ₹50 था, जो अब ₹200 कर दिया गया है। लोड बढ़ते ही हर किलोवाट पर ₹100 अतिरिक्त। सवाल यह भी है कि यदि किसी कारण कनेक्शन न मिले, तो क्या यह प्रोसेसिंग शुल्क वापस होगा?

सिंगल फेज प्रीपेड कनेक्शन: दूरी बढ़ी, शुल्क उछला
1 किलोवाट (लाइफलाइन)
- 100 मीटर तक: ₹4,225
- 100–300 मीटर: ₹6,725
- मल्टीस्टोरी/मल्टीपॉइंट: ₹3,225
1–2 किलोवाट (नॉन-लाइफलाइन)
- 100 मीटर तक: ₹5,155
- 100–300 मीटर: ₹7,155
- मल्टीस्टोरी/मल्टीपॉइंट: ₹3,655
3–4 किलोवाट
- 100 मीटर तक: ₹7,208
- 100–300 मीटर: ₹10,208
- मल्टीस्टोरी/मल्टीपॉइंट: ₹3,708
👉 100 मीटर की सीमा पार करते ही हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ।
थ्री फेज प्रीपेड कनेक्शन: मध्यम वर्ग व छोटे व्यवसाय पर सबसे भारी मार
3–4 किलोवाट: ₹11,778 → ₹18,278
5–10 किलोवाट: ₹16,358 → ₹26,358
11–15 किलोवाट: ₹26,358 → ₹46,358
16–20 किलोवाट: ₹31,358 → ₹56,358
21–24 किलोवाट: ₹41,358 → ₹76,358
25 किलोवाट: ₹47,408 → ₹82,408
👉 छोटे उद्योग, दुकानदार और बहुमंजिला भवनों के उपभोक्ता सबसे अधिक प्रभावित।
अहम सवाल
- क्या मीटर, SLC और सप्लाई अफोर्डिंग चार्ज का पूरा बोझ उपभोक्ता पर डालना न्यायसंगत है?
- 100 मीटर के बाद शुल्क में अचानक कई गुना वृद्धि का आधार क्या है?
- मल्टीस्टोरी/मल्टीपॉइंट भवनों के लिए अलग दरें—क्या यह समानता के सिद्धांत के अनुरूप है?
- कनेक्शन न मिलने की स्थिति में प्रोसेसिंग फीस वापसी का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं?
यूपीपीसहएल मीडिया का मानना है कि प्रीपेड व्यवस्था के नाम पर नए बिजली कनेक्शन की शुरुआती लागत इतनी बढ़ा दी गई है कि आम उपभोक्ता के सामने यह बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। उपभोक्ता पूछ रहे हैं—बिजली चाहिए या पहले भारी कीमत चुकानी पड़ेगी?








