बलिया | UPPCL MEDIA
बलिया जनपद के बांसडीह क्षेत्र स्थित सहपुरवा गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में खेत में गिरे 11 हजार वोल्ट (11 केवी) हाईटेंशन विद्युत तार की चपेट में आने से पिता और पुत्र की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है और बिजली विभाग की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय जनार्दन यादव अपने 24 वर्षीय पुत्र राजेश यादव के साथ खेत की ओर जा रहे थे। उनके खेत से लगभग 10 मीटर पहले 11 केवी विद्युत लाइन का तार टूटकर जमीन पर पड़ा हुआ था। आगे चल रहे राजेश का पैर अचानक उस तार पर पड़ गया और वह तेज करंट की चपेट में आकर तड़पने लगा।
अपने बेटे को बचाने के लिए पिता जनार्दन यादव बिना कुछ सोचे उसकी ओर दौड़े, लेकिन वे भी हाईटेंशन करंट की चपेट में आ गए। तेज विद्युत प्रवाह के कारण दोनों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग को दी सूचना
घटना को खेतों में काम कर रहे लोगों ने देखा और शोर मचाकर अन्य ग्रामीणों को बुलाया। तत्काल बिजली विभाग और पुलिस को सूचना दी गई। बिजली आपूर्ति बंद होने की पुष्टि के बाद ही ग्रामीणों ने दोनों के शवों को तार से अलग किया।
सूचना मिलते ही तहसीलदार बांसडीह नितिन सिंह, स्थानीय पुलिस तथा भाजपा नेता विश्राम सिंह मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।
गांव में पसरा मातम, कार्रवाई की मांग
इस हृदयविदारक घटना के बाद सहपुरवा गांव में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विद्युत लाइन का समय पर रखरखाव किया गया होता और टूटे तार की सूचना पर तत्काल कार्रवाई होती, तो दो अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
UPPCL MEDIA का सवाल
हर वर्ष उत्तर प्रदेश में टूटे हुए विद्युत तार, जर्जर लाइनें और समय पर फॉल्ट न हटने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। सवाल यह है कि:
- क्या विद्युत लाइनों की नियमित पेट्रोलिंग हो रही है?
- टूटे तार की सूचना मिलने पर तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
- ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
बिजली सुरक्षा केवल विभागीय निर्देशों से नहीं, बल्कि समय पर रखरखाव और त्वरित कार्रवाई से सुनिश्चित होती है। इस घटना ने एक बार फिर विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।







