फर्जी आवेदक बनकर जेई फंसाओ, वीडियो बनाओ, फिर करो ब्लैकमेल!
आखिरकार मसौली पुलिस के हत्थे चढ़ा कथित गैंग
बिजली विभाग के ईमानदार अभियंताओं को बदनाम करने का कथित ‘ब्लैकमेलर’ वर्षों से फर्जी आवेदक, फर्जी दस्तावेज और कथित फर्जी यूट्यूब चैनलों के सहारे विभाग में दहशत फैलाने वाले गिरोह पहले फर्जी आवेदक बनकर जेई और अभियंताओं के पास पहुंचता था। फिर बिजली कनेक्शन, एस्टिमेट और फाइल पास कराने के नाम पर खुद ही रिश्वत की भूमिका तैयार करता था। यदि कोई अधिकारी लालच में फंस जाता तो छिपे कैमरे में रिकॉर्डिंग कर उसे वायरल करने की धमकी देता, और यदि अधिकारी झांसे में नहीं आता तो उसके खिलाफ “भ्रष्टाचार” की खबरें चलाकर विभागीय कार्रवाई का माहौल बनाया जाता था।
UPPCL MEDIA | लखनऊ
राजधानी लखनऊ में बिजली विभाग के अभियंताओं को कथित रूप से ब्लैकमेल करने वाले एक संदिग्ध गिरोह का मामला सामने आया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी आवेदक बनकर बिजली कनेक्शन, एस्टिमेट और विभागीय प्रस्तावों के बहाने अभियंताओं से संपर्क करता था। बातचीत के दौरान छिपे कैमरे से वीडियो रिकॉर्ड कर बाद में खुद को पत्रकार बताकर कार्रवाई और खबर चलाने की धमकी देकर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता था।
ताजा मामले में मसौली उपकेंद्र के अवर अभियंता लाल सिंह ने सूझबूझ दिखाते हुए कथित फर्जी आवेदकों को पहचान लिया। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले से इस तरह के गिरोह की कार्यप्रणाली की जानकारी थी। इसके बाद उन्होंने अपने सहयोगी अवर अभियंता की मदद से दोनों संदिग्धों को पकड़वाकर मसौली पुलिस के हवाले कर दिया।
इस बार शिकारी खुद जाल में फंस गया!
रामनगर डिवीजन के मसौली उपकेंद्र के अवर अभियंता लाल सिंह ने कथित गैंग की चाल समय रहते भांप ली। आरोप है कि अर्बन डोर इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर 100 KVA कनेक्शन लेने पहुंचे संदिग्धों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद उन्होंने अन्य अपने सहयोगी अवर अभियंता के साथ मिलकर दोनों को पकड़वाकर मसौली पुलिस के हवाले कर दिया।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मुख्य आरोपी के रूप में सुहेल अहमद सिद्दीकी (निवासी सिद्धार्थनगर) तथा उसके सहयोगी किसान (निवासी प्रतापगढ़) का नाम सामने आया है। दावा है कि उनके पास से गोमती नगर, विराज खंड का कथित फर्जी आधार कार्ड, फर्जी खतौनी तथा स्टांप एग्रीमेंट जैसे दस्तावेज बरामद हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक पुलिस तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में थी।
‘पहले फंसाओ… फिर वसूली करो’— यही था कथित खेल?
सूत्रों का दावा है कि इस गिरोह का फॉर्मूला बेहद खतरनाक था—
फर्जी आवेदन दो → अधिकारी से मुलाकात करो → छिपे कैमरे से रिकॉर्डिंग करो → फिर खबर चलाने और निलंबन की धमकी देकर सौदेबाजी करो।
यानी पत्रकारिता नहीं… ‘ब्लैकमेल इंडस्ट्री’ चल रही थी।
ईमानदार अधिकारी बने आसान निशाना?
बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों में कई अभियंताओं को इसी तरह निशाना बनाया गया। कुछ के तबादले हुए, कुछ पर विभागीय कार्रवाई हुई और कुछ को बदनाम करने की कोशिश की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या विभाग ने कभी यह जांचने की कोशिश की कि शिकायत करने वाला वास्तव में पीड़ित था या किसी ब्लैकमेल गैंग का हिस्सा?
तीन वर्षों से कई अभियंता बने निशाना?
सूत्रों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में कई अभियंताओं को इसी तरह निशाना बनाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
- वर्ष 2023 — जेई गोमती नगर विस्तार
- वर्ष 2023 — जेई जीपीआरए
- वर्ष 2024 — जेई लवलाई
- वर्ष 2025 — जेई कामता
- वर्ष 2025 — जेई शिवपुरी
- वर्ष 2025 — जेई मोहनलालगंज
- वर्ष 2026 — विनय कुमार, जूनियर इंजीनियर, गहरू पावर हाउस
- हाल ही में 16 जून 2026 ऋषि नाथ गोस्वामी अवर अभियंता सरोसा पॉवर हाउस, व दो निर्दोष संविदा क्रम चारी अवनीश यादव, और आशुतोष यादव को फंसाया गया
इन मामलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन अभियंताओं का कहना है कि यदि सभी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
धृतराष्ट्र क्यों बना रहा विभाग?
यदि किसी यूट्यूब वीडियो या कथित पत्रकार की शिकायत पर बिना गहराई से जांच किए अधिकारियों पर कार्रवाई होती रही, तो यह केवल अभियंताओं का नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र का विषय है।
क्या ईमानदार अधिकारियों को पहले ब्लैकमेलरों से लड़ना होगा और फिर अपने ही विभाग में निर्दोष साबित होना होगा?
अभियंताओं में आक्रोश
घटना के बाद अभियंताओं में भारी नाराजगी है। कई पीड़ित अभियंता सामूहिक एफआईआर दर्ज कराने तथा पूरे नेटवर्क की जांच कराने की तैयारी में हैं।
उनकी प्रमुख मांगें हैं—
- फर्जी यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया नेटवर्क की साइबर जांच।
- ब्लैकमेल के शिकार अभियंताओं को सुरक्षा और न्याय।
- झूठी शिकायतों के आधार पर हुई विभागीय कार्रवाइयों की पुनः समीक्षा।
- बिजली विभाग में एंटी-ब्लैकमेल सेल का गठन।
UPPCL MEDIA का सीधा सवाल
- आखिर यह कथित गैंग वर्षों तक किसके संरक्षण में सक्रिय रहा?
- विभाग में इनके लिए सूचना कौन पहुंचाता था?
- झूठी शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
- क्या अब उन अभियंताओं को न्याय मिलेगा, जिनकी छवि ऐसे मामलों में धूमिल हुई?
अब फैसला पुलिस और जांच एजेंसियों के हाथ में
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ ब्लैकमेल का मामला नहीं होगा, बल्कि फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कार्य में बाधा और पत्रकारिता की आड़ में उगाही जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आएगा।
इस तरह इंजीनियर को अपने जाल में फसाता था
UPPCL MEDIA की अहम मांग
“दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होना चाहिए। फर्जी पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेल करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों— दोनों पर समान रूप से कठोर कार्रवाई हो।”

UPPCL MEDIA का मानना है कि यदि पुलिस जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल ब्लैकमेल का मामला नहीं रहेगा, बल्कि फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और पत्रकारिता की आड़ में कथित उगाही जैसे गंभीर अपराधों का मामला बन सकता है।
आखिर किन लोगों के सहयोग से यह कथित नेटवर्क वर्षों तक बिजली विभाग के भीतर सक्रिय रहा? क्या ईमानदार अभियंताओं को झूठी शिकायतों और ब्लैकमेल का डर दिखाकर इसी तरह निशाना बनाया जाता रहेगा, या अब पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा?
यदि जांच निष्पक्ष हुई तो संभव है कि केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक मामला सीमित न रहे, बल्कि उन सभी चेहरों से भी पर्दा उठे जिन्होंने पत्रकारिता की आड़ में व्यवस्था को बदनाम करने और ईमानदार अधिकारियों पर दबाव बनाने का कथित कारोबार खड़ा किया।







