अवर अभियंता का नया कारनामा …. एक ही परिसर पर “दो-दो अस्थाई विद्युत कनेक्शन का लगा मीटर”

लखनऊ। मुंशी पुलिया डिवीजन, लेसा अंतर्गत सेक्टर 14 न्यू पावर हाउस अधीनस्थ अमराई गांव पावर हाउस के अवर अभियंता महोदया का हैरत अंग्रेज कारनामा प्रकाश में आया है….

फरवरी 2024 में तकरोही निवासी दिनेश राजपूत ने आवेदन संख्या 1015024641 के माध्यम से खसरा संख्या 8254530150 पर एक काम्प्लेक्स बनवाने के लिए अस्थाई संयोजन लिया, जिसमें विभाग द्वारा एक मीटर जिसका संख्या डी- 993 है, दिनांक 5 मार्च 2024 को लगाया गया। हाल में ही उपभोक्ता दिनेश राजपूत द्वारा काम्प्लेक्स उपरांत जब नियमित कनेक्शन के लिए आवेदन किया, तो अवर अभियंता महोदया द्वारा एक और अस्थाई मीटर जिसका संख्या डी – 1018 है, दिनांक 27 मई 2024 को परिसर में स्थापित कर दिया जाता है।

उपभोक्ता दिनेश राजपूत द्वारा इस बाबत अधिशासी अभियन्ता कार्यालय को उपलब्ध करायें गये दस्तावेंज के अनुसार दिनांक 27 मई 2024 को परिसर में लगाया गया मीटर यक कह कर लगाया गया कि आप संयोजन नियमित हो गया है, शायद यहीं कारण है कि मीटर पर कहीं टीसी शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।

लाइट काटने की धमकी देते हुए जमता कराया बिल
हैरानी की बात यह है कि दिनांक 27 मई 2024 को परिसर में मीटर लगाया गया और उसके दो दिन बाद बिभाग द्वारा लाइट काटने की धमकी देते हुए दिनांक 29 मई 2024 को उपभोक्ता खाता संख्या 8254530150 पर विभाग द्वारा बिल के मद में 10875.00 रूपया रसीद संख्या 825257615259 जमा करवा लिया गया।

अस्थाई बिजली कनेक्शन भी स्थाई कनेक्शन की तर्ज पर ऑनलाइन ही जारी
बताते चले कि भवन निर्माण के लिए ऑफलाइन मिलने वाला अस्थाई बिजली कनेक्शन अब सिर्फ ऑनलाइन मिलेगा। 17 सितंबर 2021 से अस्थाई कनेक्शन के ऑॅफलाइन आवेदन पर पूरी तरह से पाबंदी लगाते हुए दो पोर्टल निर्धारित किये थे, जिसके अनुसार
20 किलोवाट तक अस्थाई कनेक्शन का आवेदन झटपट पोर्टल एवं 20 किलोवाट से अधिक के अस्थाई कनेक्शन के लिए निवेश मित्र पोर्टल पर आवेदन करना होता है, जिसके उपरान्त अधिशासी अभियंताओं द्वारा आवेदक से कनेक्शन की प्रोसेसिंग फीस, कनेक्शन शुल्क, मीटर चार्ज, लाइन चार्ज व सिक्योरिटी को ऑनलाइन जमा करानी होती है। इस बाबत पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने आदेश भी हैं। लेसा के ट्रांस व गोमती जोन के अधिशासी अभियंताओं को अस्थाई बिजली कनेक्शन का प्रति माह ऑनलाइन बिल जनरेट करके रीडर के जरिये उपभोक्ता के घर पहुंचाना होता है। साथ ही उपभोक्ता से बिल की रकम भी ऑनलाइन जमा करानी होती है। यानी अधिशासी अभियंता को प्रति माह मीटर रीडिंग करानी पड़ती है।

एक तरफ विभाग में मीटर की कमी का रोना रोया जाता है, दूसरी तरफ इस प्रकार की लापरवाही करके मीटरो को बर्बाद किया जाता है।

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