नया बिजली कनेक्शन सस्ता होने की जगह महँगा! अब “फर्स्ट रिचार्ज” के नाम पर ₹2250 की अतिरिक्त वसूली

UPERC की नई CDB-2025: कनेक्शन सस्ता करने का दावा… ज़मीनी हकीकत में बढ़ते शुल्क?

नया बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर नहीं, बल्कि जेब पर अतिरिक्त बोझ की स्थिति बनती दिख रही है। पोर्टल पर प्रदर्शित शुल्क विवरण के अनुसार, पहले जहाँ कनेक्शन लागत सीमित मदों तक रहती थी, अब “First Recharge” के नाम पर ₹2250 की अलग से राशि जोड़ी जा रही है।

स्क्रीन पर दिख रहे विवरण के अनुसार शहरी क्षेत्र (Urban) में 0.4 KV सप्लाई वाले कनेक्शन के लिए निम्न मदों में शुल्क दर्शाया गया है—

  • मीटर कॉस्ट – ₹4100
  • अन्य चार्ज – ₹10000
  • लाइन चार्ज – ₹2258
  • फर्स्ट रिचार्ज – ₹2250

कुल अनुमानित लागत ₹18608 दिखाई जा रही है।

नीचे दिए गए नोट में साफ लिखा है कि यह “First Recharge” स्मार्ट मीटर को सक्रिय करने के लिए है, जो उपभोक्ता के प्रीपेड बैलेंस के रूप में उसके खाते में क्रेडिट होगा। यानी कनेक्शन लेते समय उपभोक्ता को पहले से ही ₹2250 रिचार्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

सवाल जो उठ रहे हैं

  1. जब उपभोक्ता पहले ही मीटर कॉस्ट, लाइन चार्ज और अन्य शुल्क दे रहा है, तो स्मार्ट मीटर एक्टिवेशन का भार भी उसी पर क्यों?
  2. क्या पहले से यह प्रावधान स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया गया था?
  3. क्या यह “अनिवार्य अग्रिम रिचार्ज” उपभोक्ता पर जबरन थोपे जाने जैसा नहीं है?
  4. नए कनेक्शन को सरल और सस्ता बनाने के दावों के बीच यह अतिरिक्त मद क्यों जोड़ी गई?

उपभोक्ताओं का कहना है कि नया कनेक्शन लेने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक महँगी हो गई है। जिन परिवारों के लिए हर हजार रुपये मायने रखते हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त ₹2250 एक बड़ा बोझ है।

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रदर्शित शुल्क संरचना से जुड़ा है, जिससे स्पष्ट है कि यह व्यवस्था प्रणालीगत रूप से लागू की गई है।

उपभोक्ता हित बनाम नई व्यवस्था

स्मार्ट मीटर और प्रीपेड व्यवस्था को पारदर्शिता और सुविधा के नाम पर लागू किया गया था, लेकिन यदि कनेक्शन लेते समय ही अनिवार्य रिचार्ज थोप दिया जाए, तो यह सुविधा से अधिक आर्थिक दबाव जैसा प्रतीत होता है।

उपभोक्ता अब यह जानना चाहते हैं कि—

  • क्या यह शुल्क नियामक आयोग की स्वीकृति से है?
  • क्या इसकी पूर्व सूचना सार्वजनिक रूप से दी गई थी?

जब कनेक्शन शुल्क घटाने की बात होती है, उसी समय “फर्स्ट रिचार्ज” जैसे नए मद जोड़कर कुल लागत बढ़ जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

31 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने नई Cost Data Book (CDB)-2025 जारी की। 2019 के बाद यह पहला बड़ा संशोधन है। उद्देश्य साफ बताया गया—नया बिजली कनेक्शन सस्ता, पारदर्शी और आसान बनाना।

कागज़ पर बदलाव राहत देने वाले दिखते हैं। लेकिन उपभोक्ता पोर्टल पर दिख रहे शुल्क और “फर्स्ट रिचार्ज” जैसी नई मदों को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या लाभ वास्तव में उपभोक्ता तक पहुँच रहा है?

स्मार्ट प्रीपेड मीटर सस्ते करने का फैसला

  • सिंगल-फेज स्मार्ट मीटर: ₹2,800 (पहले ~₹6,000)
  • थ्री-फेज स्मार्ट मीटर: ₹4,100 (पहले ~₹11,000+)
  • किस्त सुविधा: ₹1,000 अग्रिम, शेष 24 किस्तों में (₹84/माह)

दावा: मीटर लागत घटाकर उपभोक्ता को राहत।

150 kW / 300 मीटर तक “नो एस्टिमेट” नियम

  • अलग से एस्टिमेट की जरूरत खत्म
  • ‘Supply Affording Charges’ पहले से तय
  • पोल/ट्रांसफॉर्मर/तार के लिए उपभोक्ता को भाग-दौड़ नहीं

दावा: प्रक्रिया सरल, पारदर्शी, समय की बचत।

सिक्योरिटी डिपॉजिट में राहत

  • 2 महीने के बजाय 45 दिन के अनुमानित बिल के बराबर जमा
  • लाइफलाइन उपभोक्ताओं के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट समाप्त

लाइफलाइन उपभोक्ताओं के लिए विशेष छूट

  • 100 मीटर तक कनेक्शन पर सिर्फ ₹500 अग्रिम
  • शेष राशि ₹45/माह की 12 किस्तों में

अन्य बदलाव

  • प्रोसेसिंग फीस में संशोधन
  • ₹20 लाख से अधिक सिक्योरिटी पर बैंक गारंटी का विकल्प

लेकिन सवाल यहीं से शुरू होते हैं…

जहाँ CDB-2025 मीटर सस्ता, प्रक्रिया आसान और अग्रिम बोझ कम करने की बात करती है, वहीं पोर्टल पर नए कनेक्शन के समय:

  • मीटर कॉस्ट
  • लाइन चार्ज
  • अन्य चार्ज
  • और अब ₹2250 “First Recharge” अनिवार्य दिखाई दे रहा है।

यदि मीटर सस्ता हुआ, एस्टिमेट खत्म हुआ, सिक्योरिटी कम हुई — तो कनेक्शन लेते समय कुल जमा राशि कम दिखनी चाहिए या ज़्यादा?

उपभोक्ताओं का तर्क है:
“राहत कागज़ पर, बोझ भुगतान स्क्रीन पर”

यह पूरा क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के पोर्टल के माध्यम से हो रहा है, जहाँ “First Recharge” को स्मार्ट मीटर एक्टिवेशन से जोड़ा गया बताया जा रहा है।

अहम सवाल:

  • क्या “First Recharge” CDB-2025 का हिस्सा है?
  • क्या इसकी स्पष्ट सार्वजनिक अधिसूचना है?
  • क्या यह अनिवार्य अग्रिम वसूली नियामक भावना के विपरीत नहीं?

जब नीति उपभोक्ता राहत की हो और भुगतान स्क्रीन अतिरिक्त मद दिखाए—तब सवाल उठना स्वाभाविक है।

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  • UPPCL MEDIA

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