प्रोटेक्शन सिस्टम, डीसी बैकअप और डीजी सेट तक ने छोड़ा साथ, ऊर्जा विभाग की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल
लखनऊ | यूपीपीसीएल मीडिया
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 23 जून 2026 को बिजली व्यवस्था उस समय पूरी तरह चरमरा गई जब दोपहर लगभग 1 बजे 220 केवी जीआईएस कानपुर रोड नादरगंज बिजली घर में बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार उपकेंद्र की दोनों लाइनें ट्रिप हो गईं, 63 एमवीए क्षमता के तीनों ट्रांसफार्मर बंद हो गए और सभी 33 केवी फीडरों की आपूर्ति प्रभावित हो गई।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिस्टम को सुरक्षित रखने वाली डीसी सप्लाई भी फेल हो गई। इतना ही नहीं, आपातकालीन स्थिति में संचालन के लिए स्थापित डीजी जनरेटर भी समय पर काम नहीं कर सका। परिणामस्वरूप राजधानी के बड़े हिस्से में बिजली आपूर्ति बाधित रही और उपभोक्ताओं को घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद शाम लगभग 5 बजे बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकी।
सबसे बड़ा सवाल – आखिर प्रोटेक्शन सिस्टम फेल कैसे हुआ?
ऊर्जा विभाग हर वर्ष प्रोटेक्शन सिस्टम, मेंटेनेंस और उपकरणों की सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करता है। इसके बावजूद राजधानी के इतने महत्वपूर्ण उपकेंद्र में एक साथ लाइन, ट्रांसफार्मर, डीसी सिस्टम और बैकअप व्यवस्था का प्रभावित होना गंभीर तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रश्न खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रोटेक्शन सिस्टम पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हो तो बड़े फॉल्ट की स्थिति में भी नुकसान को सीमित किया जा सकता है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि उस समय सुरक्षा प्रणालियां किस स्थिति में थीं और उनका नियमित परीक्षण हुआ था या नहीं।
पूर्व शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के अनुसार इस उपकेंद्र और संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में भी शिकायतें उच्च अधिकारियों तक भेजी गई थीं। चर्चा है कि 27 मई 2026 को दिए गए एक पत्र पर अब तक कोई स्पष्ट जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई। यदि शिकायतें पहले से मौजूद थीं तो उन पर समय रहते संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?
जवाबदेही तय होगी या नहीं?
राजधानी में हुए इस बड़े बिजली संकट ने पारेषण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ताओं और विभागीय हलकों में चर्चा है कि यदि समय रहते तकनीकी खामियों की पहचान और सुधार किया जाता तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—
– दोनों लाइनें एक साथ ट्रिप क्यों हुईं?
– तीनों 63 एमवीए ट्रांसफार्मर प्रभावित कैसे हुए?
– डीसी सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया?
– डीजी जनरेटर संचालन में क्यों नहीं आया?
– प्रोटेक्शन सिस्टम की स्थिति क्या थी?
– इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किसकी है?
निष्पक्ष जांच की मांग
राजधानी के महत्वपूर्ण पारेषण केंद्र में हुए इस बड़े ब्लैकआउट के बाद ऊर्जा विभाग और यूपीपीसीएल प्रबंधन से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुरक्षा और बैकअप व्यवस्था विफल हो रही है तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
जनता अब यह जानना चाहती है कि इस घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
यूपीपीसीएल मीडिया इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग करता है, ताकि राजधानी के उपभोक्ताओं को सच्चाई पता चल सके।








