⚡ UPPCL MEDIA की रिपोर्ट
सीतापुर। नैमिषारण्य क्षेत्र के लक्ष्मण नगर गांव में 10 दिन से बिजली आपूर्ति ठप होने से ग्रामीणों का सब्र शनिवार को जवाब दे गया। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष नैमिषारण्य पावर हाउस पहुंच गए और परिसर में धरना देकर बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति पर नजर बनाए रखी।
बिजली गई तो पानी भी गायब, घरों के इन्वर्टर भी हुए फेल
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार 10 दिन से बिजली न आने के कारण गांव का पूरा जनजीवन प्रभावित है। सबसे बड़ा संकट पेयजल का खड़ा हो गया है। बिजली के बिना मोटरें नहीं चल रहीं, लिहाजा ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
गर्मी के बीच बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित है और रोजमर्रा के काम भी बुरी तरह बाधित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बिजली कटौती के कारण घरों के इन्वर्टर तक जवाब दे चुके हैं।
ट्रांसफार्मर बदलते-बदलते विभाग थका या समस्या का समाधान?
ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगा ट्रांसफार्मर बार-बार फुंक रहा है। विभाग को कई बार सूचना देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर बदलने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
धरने में शामिल महिलाओं ने कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होती। समस्या दूर करने के नाम पर पैसे मांगने के आरोप भी ग्रामीणों ने लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
SDO का जवाब—तीन बार लगाया ट्रांसफार्मर, फिर भी फुंक गया
मिश्रिख एसडीओ अंकुर वर्मा के अनुसार लक्ष्मण नगर में अब तक तीन बार ट्रांसफार्मर लगाया जा चुका है, लेकिन वह बार-बार फुंक रहा है। नए ट्रांसफार्मर की मांग भेजी गई है, मगर अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है।
24 घंटे का अल्टीमेटम!
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटे में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। सवाल यह है कि आखिर 10 दिन से बिजली संकट झेल रहे ग्रामीणों को राहत के लिए आंदोलन का रास्ता क्यों अपनाना पड़ा?
UPPCL MEDIA सवाल पूछता है—
➡️ 10 दिन तक बिजली गुल रहने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं?
➡️ बार-बार ट्रांसफार्मर फुंकने की असली वजह क्या है?
➡️ ग्रामीणों द्वारा लगाए गए पैसे मांगने के आरोपों की जांच कौन करेगा?
➡️ क्या नए ट्रांसफार्मर के लिए ग्रामीणों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा?
नोट: पैसे मांगने संबंधी आरोप ग्रामीणों के हैं; विभागीय जांच/पुष्टि के बिना इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।








