लखनऊ/गाजीपुर।
गाजीपुर में एक छोटे गुमटी संचालक को ₹1.85 लाख का बिजली बिल थमाया गया। आर्थिक रूप से कमजोर दुकानदार इस झटके को सहन नहीं कर सका और उसने आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गुस्सा फूट पड़ा है। मुख्यमंत्री ने सीधे सवाल उठाया कि आखिर एक छोटे गुमटी संचालक का बिल इतना कैसे पहुंच गया?
मुख्यमंत्री के निर्देश पर संबंधित जेई, एई और एक्सईएन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं। यह कार्रवाई केवल एक मामले की नहीं, बल्कि पूरे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यूपीपीसीएल पर सबसे अहम सवाल
- जब उपभोक्ता बार-बार शिकायत करता है, बिल सुधार की गुहार लगाता है, सीएम हेल्पलाइन और आईजीआरएस पर प्रार्थना पत्र देता है, तब विभाग के अधिकारी क्यों नहीं सुनते?
- क्या विभाग में शिकायतों का निस्तारण सिर्फ कागजों पर हो रहा है?
- क्या गलत बिल बनाना, फिर उपभोक्ता को दफ्तर-दफ्तर भटकाना और अंत में उसे मानसिक प्रताड़ना देना विभाग की नई कार्यशैली बन गई है?
जनता पूछ रही है…
- गलत बिल बनने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- कितने उपभोक्ता ऐसे हैं जो गलत बिलों से परेशान हैं?
- कितनी शिकायतें बिना जांच के निस्तारित दिखा दी जाती हैं?
- आखिर आम आदमी की सुनवाई मौत के बाद ही क्यों होती है?
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि जनहित की शिकायतों में लापरवाही और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो एक दिन में 150 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया जा सकता है।
यह बयान केवल चेतावनी नहीं, बल्कि उन अधिकारियों के लिए आखिरी अलार्म है जो जनता की समस्याओं को हल्के में लेते हैं।
यूपीपीसीएल मीडिया का मानना है कि बिजली विभाग को यह समझना होगा कि गलत बिल सिर्फ कागज का एक आंकड़ा नहीं होता, बल्कि किसी गरीब परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति को तबाह कर सकता है।
यदि समय रहते शिकायत का समाधान किया गया होता, तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
अब सवाल सिर्फ गाजीपुर का नहीं है। सवाल पूरे प्रदेश के उन लाखों उपभोक्ताओं का है जो गलत बिल, स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों, फर्जी बकाया और अधिकारियों की बेरुखी से जूझ रहे हैं।
जब तक गलत बिल बनाने वाले और शिकायतों को दबाने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
मुख्यमंत्री की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह सख्ती केवल एक मामले तक सीमित रहती है या पूरे सिस्टम की सफाई तक पहुंचती है।
“एक गलत बिजली बिल ने एक जिंदगी छीन ली… अब देखना यह है कि क्या सिस्टम अपनी गलतियों से सबक लेता है या अगली त्रासदी का इंतजार करता है।”
— UPPCL MEDIA | जनता की आवाज, बिजली उपभोक्ताओं का मंच








