जनता के गुस्से के आगे झुकी सरकार, यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था पर यू-टर्न

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर महीनों से simmer कर रहा जनाक्रोश आखिरकार सरकार के फैसले में बदलाव की वजह बन गया। लगातार विरोध-प्रदर्शन, उपभोक्ताओं की शिकायतें और चुनावी माहौल में बढ़ते असंतोष के बीच सरकार को प्रीपेड व्यवस्था वापस लेकर फिर से मासिक बिलिंग प्रणाली लागू करने का फैसला करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदेश में करीब 3.58 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ताओं में से फरवरी 2026 तक लगभग 87 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे। इनमें अधिकांश स्मार्ट पोस्टपेड मीटर थे, जिन्हें विभागीय स्तर पर धीरे-धीरे प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिया गया। इसके बाद मार्च-अप्रैल में बकाया और निगेटिव बैलेंस के नाम पर बड़े पैमाने पर बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू हुई, जिससे लाखों उपभोक्ता प्रभावित हुए।

सबसे अधिक नाराजगी तब बढ़ी जब एक साथ 5 लाख से अधिक घरों की बिजली निगेटिव बैलेंस बताकर बंद कर दी गई। उपभोक्ताओं का आरोप था कि रिचार्ज कराने के बाद भी सप्लाई बहाल नहीं हुई। कई जगहों से ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि बिजली उपयोग न होने के बावजूद स्मार्ट मीटर रीडिंग बढ़ रही है। इससे लोगों के बीच यह धारणा मजबूत होती गई कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहे हैं और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। विभाग इन आशंकाओं का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहा।

शिकायत निवारण व्यवस्था भी इस विवाद की बड़ी वजह बनी। उपभोक्ताओं का कहना था कि बिलों में अनियमितता की शिकायतें हेल्पलाइन 1912 पर दर्ज कराने के बावजूद समाधान नहीं मिला और शिकायतें स्वतः बंद कर दी गईं। वहीं, जिन उपभोक्ताओं ने सोलर प्लांट लगवाए थे, उनके नेट मीटर बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने और सोलर उत्पादन का लाभ समायोजित न किए जाने से भी भारी असंतोष पैदा हुआ।

प्रदेश के कई जिलों—Lucknow, Agra, Firozabad, Varanasi, Prayagraj, Hapur, Bareilly और Mathura—में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई स्थानों पर महिलाओं ने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजली विभाग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन दृश्यों ने सरकार और संगठन दोनों की चिंता बढ़ा दी।

सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते जनाक्रोश और चुनावी वर्ष में नकारात्मक माहौल बनने की आशंका को देखते हुए सरकार पर दबाव बढ़ा। इसके बाद ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रीपेड सिस्टम समाप्त करने और फिर से मासिक बिलिंग लागू करने की घोषणा की। साथ ही बकाया बिल जमा करने के लिए किस्तों की सुविधा देने और एक महीने के भीतर किसी भी हालत में बिजली न काटने के निर्देश जारी किए गए।

स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर सरकार का यह यू-टर्न साफ संकेत देता है कि बिजली सुधारों के नाम पर लागू की गई व्यवस्थाओं में यदि पारदर्शिता, तकनीकी विश्वसनीयता और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र न हो, तो जनता का भरोसा डगमगा सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या स्मार्ट मीटर की खामियां दूर होंगी, या यह विवाद आने वाले समय में फिर नए रूप में सामने आएगा?

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