मोतीराम अड्डा उपकेंद्र में भ्रष्टाचार पर गिरी गाज
मगर सवाल कायम — क्या बड़े अफसर को बचा लिया गया?
चौरी-चौरा/मोतीराम अड्डा | उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार और नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध कार्यों के खिलाफ आखिरकार विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा खंड अंतर्गत मोतीराम अड्डा उपकेंद्र में पांच पोल की अवैध लाइन शिफ्टिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जेई और टीजी-2 को निलंबित कर दिया गया है, जबकि तीन संविदाकर्मियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
इस कार्रवाई से पूरे बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है।
🔎 अधीक्षण अभियंता केके राठौर की सख्ती से टूटा भ्रष्टाचार का तंत्र
अधीक्षण अभियंता के.के. राठौर द्वारा कराई गई विभागीय जांच में अवैध लाइन शिफ्टिंग का पूरा खेल सामने आ गया। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मई 2025 में मोतीराम अड्डा उपकेंद्र के अंतर्गत बिना अनुमति, बिना तकनीकी स्वीकृति और नियमों को ताक पर रखकर पांच पोल की लाइन शिफ्ट कर दी गई थी।
यह कार्य न केवल अवैध था, बल्कि इससे विभाग को आर्थिक नुकसान और उपभोक्ताओं को जोखिम में डालने वाला कदम भी साबित हो सकता था।
❗ दोषी पाए गए अधिकारी-कर्मचारी
जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने निम्नलिखित कार्रवाई की —
निलंबित अधिकारी-कर्मचारी:
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अवर अभियंता सुरेश चंद पाल
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टीजी-2 राजदेव
बर्खास्त संविदाकर्मी:
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लाइनमैन अंगद प्रजापति
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लाइनमैन सतीश कुमार
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लाइनमैन राजकुमार
⚠ चौंकाने वाला मोड़ — खुद जेई ने कराया था मुकदमा
मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि अवैध लाइन शिफ्टिंग के समय खुद जेई सुरेश चंद पाल ने इस कार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन आठ महीने तक चली लंबी और गहन जांच में यह साफ हो गया कि इस पूरे अवैध कार्य में विभागीय मिलीभगत शामिल थी।
जांच की आंच जब ऊपर तक पहुंची, तो सबूतों के आधार पर यह सख्त कार्रवाई की गई।
🔥 बड़ा सवाल — क्या किसी प्रभावशाली अधिकारी को बचा लिया गया?
विभागीय सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं में अब एक और बड़ा सवाल उठ रहा है —
क्या इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड कोई बड़ा अधिकारी है?
कहा जा रहा है कि इस अवैध लाइन शिफ्टिंग के पीछे एक प्रभावशाली अफसर की भूमिका रही है, जिसे बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई कर मामला रफा-दफा कर दिया गया।
यदि यह सच है, तो यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी।
📢 यूपीपीसीएल मीडिया की मांग
यूपीपीसीएल मीडिया मांग करता है कि —
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
- जिम्मेदार बड़े अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया जाए
- विभागीय भ्रष्टाचार की जड़ों पर सीधा प्रहार किया जाए
क्योंकि जब तक “बड़े मगरमच्छ” सुरक्षित रहेंगे, तब तक बिजली विभाग में अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा।








