यूपीपीसीएल मीडिया | विशेष रिपोर्ट
बिजली गई तो वर्दी उतारकर गाली पर उतर आया सिस्टम!
सिरौली पावर हाउस में तैनात एसएसओ को दरोगा ने दी मां-बहन की गालियां … पुलिस कप्तान का नाम लेकर जेई को भी दी जेल भेजने की धमकी
जिला बरेली की तहसील आंवला अंतर्गत सिरौली पावर हाउस से कानून और व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बिजली आपूर्ति में बाधा से नाराज एक दरोगा ने अपनी वर्दी की मर्यादा भूलते हुए पावर हाउस में तैनात एसएसओ के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और धमकी का सहारा लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली कटौती को लेकर दरोगा पावर हाउस पहुंचा और बिना किसी शालीनता के एसएसओ को मां-बहन की गालियां देने लगा। यही नहीं, दरोगा ने पुलिस कप्तान का नाम लेकर अवर अभियंता (JE) को जेल भेजने की धमकी तक दे डाली।
घटना के बाद पावर हाउस कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी कारणों से बिजली बाधित हुई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपमान और धमकी का सामना करना पड़ा।
क्या है प्रकरण?
जिला बरेली की तहसील आंवला अंतर्गत सिरौली पावर हाउस से एक शर्मनाक और व्यवस्था को आईना दिखाने वाला मामला सामने आया है। बिजली आपूर्ति में बाधा से नाराज होकर सिरौली थाने में तैनात एक दरोगा ने अपने मोबाइल नंबर 9368685600 से पावर हाउस सिरौली में एसएसओ पद पर तैनात संविदा कर्मी वीरेश को बार-बार कॉल कर मां-बहन की गालियां दीं।
यह घटना सिर्फ एक कर्मचारी का अपमान नहीं, बल्कि उस सोच का प्रदर्शन है जिसमें वर्दी का रौब जनसेवा पर भारी पड़ता दिख रहा है।
बिजली समस्या है, पर क्या गाली देना अधिकार है?
बिजली आपूर्ति बाधित होना एक तकनीकी और व्यवस्थागत समस्या हो सकती है—लाइन फॉल्ट, मेंटेनेंस, ओवरलोड या आपात स्थिति। लेकिन क्या किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह ड्यूटी पर तैनात संविदा कर्मी को अश्लील गालियां दे?
यदि यही व्यवहार “कानून के रखवाले” करेंगे, तो आम नागरिक से शालीनता की अपेक्षा कैसे की जाएगी?
अब सवाल यह है कि—
👉 क्या वर्दी में बैठा कानून का रखवाला ही कानून तोड़ने पर उतर आए?
👉 क्या पुलिस कप्तान का नाम लेकर सरकारी कर्मचारियों को डराया जाना जायज है?
👉 क्या बिजली विभाग के कर्मचारियों की कोई सुरक्षा नहीं?
विभागीय चुप्पी या कार्रवाई?
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि
- पावर हाउस सिरौली के अवर अभियंता इस अपमान पर क्या रुख अपनाते हैं?
- उच्च अधिकारी संविदा कर्मी के सम्मान और सुरक्षा के लिए खड़े होते हैं या मामले को रफा-दफा किया जाता है?
- पुलिस विभाग अपने ही महकमे के कर्मी के आचरण पर क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है?
कानूनी कार्रवाई के मूड में एसएसओ वीरेश
सूत्रों के अनुसार, गालियां झेलने वाले एसएसओ वीरेश कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। सवाल यह भी है कि इस लड़ाई में कौन-कौन साथ देगा—विभाग, यूनियन या सिर्फ कागज़ी आश्वासन?
यूपीपीसीएल मीडिया का सवाल
- जब बिजली विभाग का संविदा कर्मी सुरक्षित नहीं, सम्मानित नहीं—तो सिस्टम सुधार की बातें किसके लिए हैं?
- वर्दी हो या कुर्सी—अहंकार का लाइसेंस किसी को नहीं।
- अब देखना यह है कि यह मामला न्याय तक पहुंचता है या फिर एक और फाइल बनकर दबा दिया जाता है।
यूपीपीसीएल मीडिया मांग करता है कि दोषी पर तत्काल, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई हो—ताकि संदेश साफ जाए: बिजली की समस्या का समाधान संवाद से होगा, गाली से नहीं।








