राजस्व वसूली में घोर लापरवाही या सुनियोजित खेल? पद पर तैनाती से पहले ही तकनीकी अधीक्षण अभियंता को थमा दिया नोटिस

⚡ गोमती नगर जोन में मुख्य अभियंता सुशील गर्ग का “अंधेर नगरी–चौपट राजा” मॉडल बेनकाब

यूपीपीसीएल मीडिया | विशेष रिपोर्ट

लखनऊ (गोमती नगर जोन)। मध्यांचल डिस्कॉम के गोमतीm नगर जोन में प्रशासनिक विवेक, नियम और जवाबदेही—तीनों को ताक पर रख देने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजस्व वसूली जैसे विशुद्ध वाणिज्यिक (बिलिंग) प्रकरण में अधीक्षण अभियंता (बिलिंग) को छोड़कर अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) को नोटिस जारी कर दिया गया—वह भी उस अवधि के लिए, जब संबंधित अधिकारी पद पर तैनात ही नहीं थे

यह फैसला किसी निचले स्तर के अधिकारी का नहीं, बल्कि स्वयं मुख्य अभियंता, गोमती नगर जोन—सुशील गर्ग द्वारा लिया गया है। सवाल यह है कि जिस अधिकारी का राजस्व वसूली से कोई सीधा संबंध नहीं, उसी पर कार्रवाई क्यों—और असली जिम्मेदार पूरी तरह सुरक्षित क्यों?

पद पर थे ही नहीं, फिर भी जिम्मेदार ठहरा दिए गए

सूत्रों के अनुसार, इंजीनियर नवीन चंद्र प्रसाद ने 1 दिसंबर 2025 को अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) का कार्यभार ग्रहण किया। इसके बावजूद नवंबर 2025 की राजस्व वसूली को लेकर उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया।

👉 जिस अधिकारी ने नवंबर में पदभार संभाला ही नहीं, उसकी जिम्मेदारी कैसे तय की जा सकती है?
यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि Natural Justice (प्राकृतिक न्याय) का भी सीधा मज़ाक है।

बिलिंग अधिकारी को क्लीन चिट?

नोटिस में आरोप लगाए गए—

  • राजस्व वसूली में रुचि न होना
  • नेवर पेड/लॉन्ग अनपेड उपभोक्ताओं पर कार्रवाई न होना
  • रीडिंग आधारित बिलिंग में विफलता
  • विद्युत चोरी रोकने में नाकामी

जबकि ये सभी दायित्व अधीक्षण अभियंता (बिलिंग) के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं।

इसके बावजूद—

  • अधीक्षण अभियंता (बिलिंग) को कोई नोटिस नहीं
  • ⚠️ अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) को चेतावनी व दंडात्मक कार्रवाई की धमकी

यह चयनात्मक कार्रवाई विभागीय निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

नोटिस की भाषा भी कटघरे में

नोटिस में दिसंबर 2025 के लिए ₹109.35 करोड़ के मासिक लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने का दबाव है, और लक्ष्य न पाने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी। जबकि तकनीकी अधीक्षण अभियंता का दायित्व संचालन और तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा है—सीधी राजस्व वसूली से नहीं

‘अंधेर नगरी–चौपट राजा’ की सटीक तस्वीर

विभागीय जानकारों के अनुसार, यह कोई साधारण प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि—
👉 जिम्मेदारी किसी और की, कार्रवाई किसी और पर
वाली कार्यशैली का स्पष्ट उदाहरण है।

असली जिम्मेदार कौन?

  • बिलिंग
  • रीडिंग आधारित बिल
  • नेवर पेड / लॉन्ग अनपेड
  • विद्युत चोरी निरोध

👉 ये सभी बिलिंग विंग के कार्य हैं।
फिर भी बिलिंग अधीक्षण अभियंता पर एक पंक्ति का नोटिस नहीं

सवालों के घेरे में मुख्य अभियंता सुशील गर्ग

  • क्या यह जानबूझकर की गई चयनात्मक कार्रवाई है?
  • क्या तकनीकी अधिकारी को “बलि का बकरा” बनाया गया?
  • क्या असली जिम्मेदारों को बचाने की पटकथा पहले से लिखी थी?
  • क्या यही है सुशील गर्ग की “प्रशासनिक समझदारी”?

यह केवल गलती नहीं, सिस्टम की बीमारी है

यह मामला बताता है कि—

  • गोमती नगर जोन में जवाबदेही का पैमाना उल्टा है
  • नया, तकनीकी और असुरक्षित अधिकारी आसान निशाना है
  • असली जिम्मेदार फाइलों के पीछे सुरक्षित हैं

⚡ यूपीपीसीएल मीडिया की दो टूक मांग

  • इस अवैध और तर्कहीन नोटिस को तत्काल निरस्त किया जाए
  • स्पष्ट किया जाए कि बिलिंग प्रकरण में तकनीकी अभियंता को नोटिस किस आधार पर दिया गया
  • मुख्य अभियंता सुशील गर्ग की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
  • कार्रवाई वास्तविक जिम्मेदारों पर हो, न कि बलि का बकरा बनाया जाए

यदि यही “सुशासन” है, तो फिर गिरती राजस्व स्थिति और विभागीय अव्यवस्था के लिए दोषी कौन—अधिकारी या ऐसा नेतृत्व?

यूपीपीसीएल मीडिया इस पूरे प्रकरण पर पैनी नजर बनाए हुए है। सवाल पूछे जाते रहेंगे… जवाब देना पड़ेगा।

  • UPPCL MEDIA

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