अमेठी। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की बहुप्रचारित बिजली बिल राहत योजना अमेठी जिले में उपभोक्ताओं के लिए राहत की जगह परेशानी का सबब बनती जा रही है। राहत शिविरों में पंजीकरण के नाम पर लिए जा रहे ₹2000 की धनराशि छूट में समाहित न होने से उपभोक्ता भ्रमित और नाराज़ हैं। स्थिति यह है कि शिविरों में लंबी कतारें तो लग रही हैं, लेकिन स्पष्ट जानकारी के अभाव में उपभोक्ता ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जिले के अमेठी, गौरीगंज, जगदीशपुर और तिलोई डिविजन में इस योजना के तहत 90,483 उपभोक्ता शामिल बताए जा रहे हैं, जिन पर कुल 230.68 करोड़ रुपये का बकाया है। बावजूद इसके, राहत शिविरों में अव्यवस्था और अस्पष्ट नियमों ने योजना की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार को गौरीगंज उपखंड कार्यालय में लगे शिविर में पहुंचे उपभोक्ता राममिलन ने बताया कि उन पर ₹21,000 का बिजली बिल बकाया था। ₹2000 देकर पंजीकरण कराने के बाद उन्होंने छूट के बाद ₹9,326 जमा किया, लेकिन पंजीकरण की रकम को बिल समायोजन में शामिल ही नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पंजीकरण अनिवार्य है तो उसकी रकम छूट में क्यों नहीं जोड़ी जा रही।
वहीं दीपक कुमार कश्यप ने बताया कि उन पर ₹7,484 का बकाया था। शिविर में छूट मिलने की जानकारी दी गई, लेकिन मौके पर यह कहकर लौटा दिया गया कि उन्हें किसी भी तरह की छूट नहीं मिलेगी। इससे साफ है कि शिविरों में कर्मचारियों के पास खुद ही स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं।
सबसे गंभीर मामला राजाराम का है, जिन्हें एक ही मीटर नंबर पर डबल कनेक्शन दे दिया गया। पिछले चार वर्षों से लगातार गलत बिल भेजे जा रहे हैं। राजाराम का कहना है कि वह जिलाधिकारी से लेकर विभागीय अफसरों तक के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऊर्जा निगम की लापरवाही और जवाबदेही की कमी के कारण राहत योजना भरोसे की बजाय संदेह का कारण बन रही है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि पंजीकरण धनराशि को स्पष्ट रूप से छूट में समाहित किया जाए और शिविरों में सही व एकरूप जानकारी दी जाए।
अब सवाल यह है कि क्या UPPCL उपभोक्ताओं की इस वास्तविक परेशानी को गंभीरता से लेगा, या फिर राहत योजना सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित रह जाएगी?








