बस्ती। गौर ब्लॉक के मेंहदिया रामदत्त गांव में किसान रामगोविंद की मौत का जिम्मेदार खुद बिजली विभाग निकला है। विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच ने साफ कर दिया कि विभागीय लापरवाही और सिस्टम की खामियों ने एक गरीब किसान की जिंदगी छीन ली।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 11 अक्टूबर को आई आंधी के दौरान ओवरहेड लाइन का तार टूटकर सड़क किनारे गिर गया था, लेकिन बिजली विभाग ने न तो लाइन ट्रिप की, न ही तार को समय पर हटाया। उसी टूटी हुई लाइन में करंट दौड़ता रहा और जब सुबह 70 वर्षीय किसान रामगोविंद घास काटने निकले, तो उनका पैर तार पर पड़ते ही मौत ने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया।
विद्युत सुरक्षा विभाग ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि यह हादसा “पूर्णत: मानवीय लापरवाही” का नतीजा है। लाइन का रखरखाव तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया था, ट्रांसफॉर्मर सेकेंड्री साइड पर उचित क्षमता का लिंक्ड स्विच व फ्यूज नहीं लगाया गया था और अर्थ गार्डिंग (लूप गार्डिंग) का अभाव पाया गया — जो विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन है।
सहायक निदेशक, विद्युत सुरक्षा बस्ती जोन ने कहा कि जांच रिपोर्ट बिजली विभाग को भेज दी गई है और मृतक किसान के परिजनों को क्षतिपूर्ति देने की सिफारिश की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि —
क्या विभाग दोषी कर्मियों पर कार्रवाई करेगा या एक और जान की कीमत “कागजी रिपोर्ट” में दबा दी जाएगी?
🌀 यूपीपीसीएल मीडिया का सवाल:
अगर सिस्टम “सुरक्षा” नहीं दे सकता, तो आखिर जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
यह सिर्फ एक किसान की मौत नहीं, बल्कि बिजली विभाग की लापरवाही की “जीवंत रिपोर्ट” है।








