रात होते ही डूब जाता है जैदपुर! आखिर कब बहाल होगी रोशनी?

बाराबंकी जिले में मानसून की शुरुआत ने जहां एक ओर लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर विद्युत विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है।

बाराबंकी जिले में मानसून की शुरुआत ने जहां एक ओर लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर विद्युत विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। हल्की बारिश और सामान्य तेज हवा ने ही जिले के जैदपुर विद्युत उपखंड केंद्र के अंतर्गत आने वाली रानीगंज लाइन की स्थिति को उजागर कर दिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप रही और लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक, बीती रात रानीगंज लाइन पर रात 11 बजे बिजली सप्लाई अचानक ठप हो गई, जो अगले 10 घंटे तक बहाल नहीं हो सकी। इस दौरान दर्जनों गांव अंधेरे में डूबे रहे। बरसात के इस मौसम में बिजली की अनुपलब्धता ने उपभोक्ताओं की परेशानी को और बढ़ा दिया। सबसे अधिक समस्या छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को हुई, जो उमस भरी गर्मी में रातभर तड़पते रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि जैदपुर विद्युत उपखंड की यह रूटीन बन गई है। हल्की हवा या बूंदाबांदी भी हो जाए तो रात्रि में लाइन फाल्ट हो जाता है और फिर घंटों तक बिजली नहीं आती। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब वे रात्रि में पावर हाउस पर कॉल करते हैं, तो वहां से सिर्फ यही जवाब मिलता है कि “लाइन ब्रेकडाउन है, अब सुबह ही ठीक होगी।” इस तरह की गैरजिम्मेदाराना जवाबदेही ने जनता का आक्रोश और भी बढ़ा दिया है।

गौरतलब है कि जैदपुर उपखंड के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। फोन करने पर कई बार तो कर्मचारी फोन ही नहीं उठाते और अगर उठा भी लिया तो बारिश या हवा का हवाला देकर फोन काट दिया जाता है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि गर्मी के दिनों में मेंटेनेंस के नाम पर कई-कई घंटे बिजली काटी गई, लेकिन वास्तविकता में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। यही वजह है कि बारिश की हल्की बूंदें भी लाइन फाल्ट का कारण बन रही हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि मेंटेनेंस सही तरीके से किया गया होता, तो इतनी मामूली बारिश और हवा में लाइन ट्रिप नहीं होती। तार टूटना, इंसुलेशन फटना और बार-बार फाल्ट आना यह दर्शाता है कि पूरे विद्युत तंत्र की हालत खस्ताहाल है। अधिकारी सिर्फ मौखिक दावे करते हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि विद्युत विभाग की इस लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, पावर हाउस में रात्रिकालीन व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि आपातकालीन स्थिति में त्वरित समाधान संभव हो सके। नहीं तो आने वाले दिनों में जनाक्रोश और भी उग्र हो सकता है।

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