कनेक्शन काटना बिजली विभाग को 44 साल बाद पड़ा भारी, क्षतिपूर्ति नहीं देने पर बिजली विभाग का दफ्तर हुआ सील

गाजीपुर। जिले में कोर्ट के आदेश के बावजूद एक उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति नहीं देने पर बिजली विभाग (Electricity Department) का दफ्तर सील कर दिया गया। अपर जिला जज के आदेश पर मंगलवार की शाम लालदरवाजा स्थित बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता एवं विद्युत वितरण खण्ड प्रथम समेत अन्य कार्यालयों को सील कर दिया गया।कोर्ट के आदेश के अनुसार एक महीने के लिए यह कार्यालय सील रहेगा। अपने तरह की इकलौती घटना से पूरे बिजली विभाग (Electricity Department) के कर्मचारियों और अधिकारियों में अफरातफरी मची रही।उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के बिजली विभाग में अचानक कोर्ट के अमीन पहुंच गए और उनके साथ पुलिस भी मौजूद थी. पुलिस ने एक-एक कर सभी अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया और आखिर में ऑफिस सीज कर दिया. अधिकारीी इस बात को समझ ही नहीं पाए आखिर में उन्होंने कोर्ट अमीन से मामले के बारे में जानने के लिए कहा. जिसके बाद उन्हें पता चला कि यह कोई आज का मामला नहीं है 44 साल पुराना मामला है।पूरा वाकया 1980 का है जब गाजीपुर के माल गोदाम रोड पर बाबूलाल साहू रहते थे। उन्होंने अपने घर में आटा चक्की और तेल निकालने वाली मशीन लगाई हुई थी। बिजली विभाग (Electricity Department) के अधिकारी एक दिन उनके घर पहुंचे और चुपके से रात करीब 1 बजे बिजली काट दी। बिजली कटने के बाद उपभोक्ता ने कोर्ट की शरण ली। तब से लेकर अभी तक कोर्ट में केस चलता रहा।वादी की तीसरी पीढ़ी इस कानून की लड़ाई को अब तर लड़ती आ रही है। बाबूलाल साहू के पोते गणेश साहू भी इस मामले में कोर्ट की पेशी करते रहे। यह केस हाई कोर्ट में भी गया। आखिरकार कोर्ट ने बिजली विभाग (Electricity Department) के खिलाफ फैसला सुनाया और वादी को 1980 से लेकर 1 मई 2014 तक 4 हजार रुपये प्रति महीने के हिसाब से क्षतिपूर्ति भरने देने का फैसला सुनाया। इसका मतलब है कि बिजली विभाग को वादी को कुल 16,32,000 रुपये देने थे। कोर्ट के आदेश के बाद भी बिजली विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।कोर्ट की ओर से कई बार बिजली विभाग (Electricity Department) को इस मामले में कार्रवाई करने के लिए नोटिस भेजा गया, लेकिन बिजली विभाग की उदासीनता बनी रही। इसके बाद कोर्ट ने 13 अगस्त को बिजली विभाग के आम घाट कार्यालय खंड 2 की निजी संपत्ति को एक महीने तक कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश के बाद कोर्ट के अमीन दिलीप यादव और पुलिस बिजली विभाग पहुंचे। सील की कार्रवाई पूरी की गई है।

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