बिजली लाइनों, फीडरों और उपकेंद्रों में मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता सत्यापन कहीं भ्रष्टाचार का हिस्सा तो नहीं??

लखनऊ। पावर कारपोरेशन द्वारा गर्मियों से तमाम योजनाओं के माध्यम खरबों रूपये फूकने हुए बिजली लाइनों, फीडरों और उपकेंद्रों की मरम्मत के कार्यों को कराने एवं उस कार्यों की गुणवत्ता व मात्रा की जांच हेतु करोड़ों रूपया का टेण्डर करने के बाद भी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल के आदेश पर उसी कार्यो के गुणवत्ता की जांच हेतु पिछले तीन व्यापक स्तर पर अभी तक का सबसे वड़ा अभियान चलाया गया, जिसमें सम्पूर्ण प्रदेश में प्रबन्ध निदेशक से लेकर अवर अभियन्ता तक ड्यूटी लगाकर सत्यापन का कार्य कराया गया, जिसके तहत प्रबन्ध निदेशक से लेकर अवर अभियन्ता तक अपना अन्य विभागीय एवं व्यक्तिगत कार्य को दरकिनार करते हुए पिछले तीन दिन तक दिन रात एक करते हुए बिजली लाइनों, फीडरों और उपकेंद्रों पर हुए कार्यों की गुणवत्ता की जॉच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट सोमवार तक अध्यक्ष पावर कारपोरेशन तक पहुॅचेगी।

हैरानी की बात यह है कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल के आदेश पर प्रबन्ध निदेशक से लेकर अवर अभियन्ता तक एक बन्धुआ मजदूर की तरह पिछले तीन दिन तक दिन रात एक करते हुए बिजली लाइनों, फीडरों और उपकेंद्रों पर हुए कार्यों की गुणवत्ता सम्बन्धित सत्यापन के कार्यो हेतु किया, उसी कार्य के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण जोनल क्वालिटी मॉनिटरिंग एजेंसी मेमर्स रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड, (राइट्स) गुड़गांव से कराए जाने हेतु टेंडर के माध्यम से अनुबंध कर रखा है, उस कार्य को स्वयं कर रहे है, आखिर क्यों ?? क्या पिछले तीन तक विभागीय मैनपावर का प्रयोग किया गया, क्या वह निःशुल्क था??

विदित हो कि राज्य सरकार के तमाम योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बिजली लाइनों, फीडरों और उपकेंद्रों में मरम्मत कार्य होने के उपरान्त उसकी गुणवत्ता जॉच हेतु थर्ड पार्टी राइट्स द्वारा निरीक्षण आख्या उपलब्ध होने की पूर्व ही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ आशीष गोयल के आदेश पर प्रदेश के समस्त डिस्कॉम के प्रबन्ध निदेशक से लेकर अवर अभियन्ता तक ड्यूटी लगाकर सत्यापन का कार्य कराया गया …. बात यहीं खत्म नहीं होती इन अधिकारियों के सत्यापन के बाद फिर से डिस्कॉम की एक और टीम द्वारा पूर्व में प्रबन्ध निदेशक से लेकर अवर अभियन्ता द्वारा किए गए कार्यो का भौतिक सत्यापन करते है…. एक ही डिस्कॉम के अधिकारियों किए गए सत्यापन रिपोर्ट के बाद प्रस्तुत सत्यापन रिपोर्ट को उसी डिस्कॉम के अधिकारियों द्वारा फिर से उपरोक्त कार्यो की गुणवत्ता पर अपनी रिपोर्ट लगाते हैं…. इन सब के बाद सबसे अंत में रेल इंडियन टेक्निकल एंड इकोनामिक सर्विस लिमिटेड (राइट्स) गुड़गांव से सत्यापन संबंधित कार्य कराए जाएंगे। आखिर क्यों ?? क्या उनको अपने अधिकारीयों पर भरोसा/विश्वास नहीं, जो करोड़ों रुपये टेंडर पर फूंकने के लिए तैयार है… कहीं ऐसा तो नहीं यह टेण्डर लूट टेण्डर तो नहीं ?? जैसा कि कई विभागीय अधिकारी की आंशंका व्यक्त कर रहे है, उन सभी अधिकारीयों का मानना है कि हमारे ही रिपोर्ट को राइट्स फर्म द्वारा कापी कर उसकी रिपोर्ट मुख्यालय प्रस्तुत कर 50 प्रतिशत की मोटी कमीशन पर इसकी बिलिंग हो जायेंगी और इसमें घोटला भी नजर नहीं आयेगा… क्योंकि जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काज़ी… अतः में सिर्फ एक लाइन में … बिजली लाइनों, फीडरों और उपकेंद्रों में मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता सत्यापन कहीं भ्रष्टाचार का हिस्सा तो नहीं??

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