मऊ। बड़रांव ब्लॉक क्षेत्र स्थित चंद्रापार गौशाला में बुधवार सुबह जर्जर बिजली तार टूटकर गिरने से बड़ा हादसा हो गया। करंट की चपेट में आने से चार बछड़ों समेत पांच गोवंश की मौत हो गई, जबकि गौशाला का केयरटेकर बाल-बाल बच गया। घटना के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला।
बताया गया कि हादसा सुबह करीब साढ़े छह बजे हुआ। गौशाला के ऊपर से गुजर रहा 440 वोल्ट का तीन-फेज बिजली तार अचानक टूटकर परिसर में गिर गया। उस समय गौशाला में करीब एक दर्जन गोवंश मौजूद थे। तार के संपर्क में आने से चार बछड़े और एक गाय गंभीर रूप से झुलस गए और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।
हादसे की सूचना मिलते ही उपमुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. मोहिंद्र प्रसाद के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची। गौशाला संचालक संस्था के प्रतिनिधियों और बीडीओ की मौजूदगी में मृत गोवंश का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद नियमानुसार सभी मृत गोवंश को गड्ढा खोदकर दफना दिया गया।
पहले भी की गई थी जर्जर तारों की शिकायत
हादसे ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गौशाला का संचालन कर रही श्री बजरंग बली स्मारक शिक्षा व कल्याण समिति के प्रतिनिधि रामप्यारे प्रजापति के मुताबिक, जर्जर बिजली तारों को लेकर 9 जुलाई को लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
गौशाला प्रशासक शंकर चौहान ने दावा किया कि गौशाला के ऊपर से गुजर रहे तीनों फेस के बिजली तारों में करीब दस स्थानों पर जोड़ हैं। उनका कहना है कि इन जर्जर तारों को बदलवाने के लिए करीब तीन वर्ष पहले तहसील दिवस और थाना दिवस में भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन तार नहीं बदले गए।
केयरटेकर ने सुनाई हादसे की पूरी कहानी
गौशाला के केयरटेकर सुरेश कुमार निवासी कन्धेली ने बताया कि वह सुबह गोवंश की देखभाल कर रहे थे। इसी दौरान अचानक बिजली का तार टूटकर नीचे गिर गया और कई गोवंश उसकी चपेट में आ गए। तार टूटने के दौरान वह स्वयं भी हादसे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।
बिजली विभाग ने प्राक्कलन दिए जाने की बात कही
मामले में अवर अभियंता जय सिंह ने बताया कि उन्हें क्षेत्र में आए करीब तीन महीने ही हुए हैं और उन्हें पूर्व की शिकायतों की पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि उनसे पहले केबलिंग के लिए प्राक्कलन तैयार किए जाने की प्रक्रिया की गई थी।
वहीं, बीडीओ धर्मेंद्र कुमार और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।
114 गोवंश की जिम्मेदारी, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
चंद्रापार अस्थाई गौशाला में वर्तमान में करीब 114 गोवंश हैं और उनकी देखभाल के लिए चार केयरटेकर नियुक्त हैं। ऐसे में गौशाला के ऊपर से गुजर रहे जर्जर और कई स्थानों पर जुड़े हुए बिजली तारों को लेकर पहले से शिकायतें होने का दावा सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर समय रहते विद्युत लाइन को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?
पांच गोवंश की मौत के बाद अब ग्रामीण बिजली विभाग से जिम्मेदारी तय करने और जर्जर विद्युत तारों को तत्काल बदलवाने की मांग कर रहे हैं। हादसे ने गौशालाओं के आसपास विद्युत लाइनों की सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
UPPCL MEDIA की नजर अब इस बात पर रहेगी कि शिकायतों के बावजूद जर्जर लाइन को लेकर क्या कार्रवाई होती है और पांच गोवंश की मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाती है।








