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तेज बारिश के बाद कई इलाकों में फाल्ट, 33 केवी लाइन और बिजली पोल टूटने से मचा हाहाकार
गाजियाबाद। तेज बारिश के बाद ट्रांस हिंडन क्षेत्र के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई। शुक्रवार शाम हुई बारिश के बाद इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी, शालीमार गार्डन, साहिबाबाद, बृज विहार, वसुंधरा और लोनी सहित कई क्षेत्रों में बिजली के फाल्ट सामने आए। कई जगहों पर लाइन में खराबी और जंपर फुंकने से आपूर्ति बाधित रही।
शालीमार गार्डन में 33 केवी लाइन में फाल्ट
शालीमार गार्डन में 33 केवी लाइन में फाल्ट होने के कारण आसपास के क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। रातभर विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी और करीब सुबह 4 बजे स्थिति सामान्य हो पाई। बिजली गुल रहने से लगभग 30 हजार की आबादी को गर्मी और अंधेरे में परेशानी का सामना करना पड़ा।
वसुंधरा में पोल टूटने से कई सेक्टर प्रभावित
वसुंधरा सेक्टर-5 में बिजली का पोल टूट जाने से आसपास के क्षेत्रों की बिजली गुल हो गई। सेक्टर-5, 7, 9 और 11 समेत कई सेक्टरों के लोग रातभर परेशान रहे। विद्युत कर्मी पोल बदलने और आपूर्ति बहाल करने में जुटे रहे। करीब रात 1 बजे यहां बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकी।
लंबे समय तक बिजली नहीं आने के कारण घरों में लगे इन्वर्टर भी एक से डेढ़ घंटे में जवाब दे गए, जिसके बाद लोगों को उमस और अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी।
शनिवार को भी बिजली की आवाजाही जारी
ट्रांस हिंडन के विभिन्न इलाकों में शनिवार को भी बिजली की आवाजाही बनी रही। कहीं शटडाउन के कारण 2 से 3 घंटे बिजली बंद रही तो कहीं पेड़ों की छंटाई के चलते आपूर्ति प्रभावित हुई। छोटे-छोटे फाल्ट के कारण कुछ क्षेत्रों में करीब 4 घंटे तक बिजली गुल रही।
इंदिरापुरम के न्याय खंड-2 और 3 में करीब साढ़े चार घंटे बिजली बाधित रहने की जानकारी सामने आई।
अधिकारियों ने कहा—बड़े फाल्ट में लगा समय
विद्युत निगम के मुख्य अभियंता बृजेश कुमार, विद्युत निगम जोन-3 के अनुसार, बारिश के दौरान जिन इलाकों में फाल्ट हुए थे, उन्हें ठीक करने के लिए विद्युत कर्मी तत्काल मौके पर पहुंच गए थे। कुछ स्थानों पर बड़े फाल्ट होने के कारण आपूर्ति बहाल करने में समय लगा। उनके अनुसार अब सभी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य है।
UPPCL MEDIA की नजर: तेज बारिश के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन रातभर बिजली गुल रहने से हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ी। ऐसे में बारिश के मौसम में फाल्ट की त्वरित पहचान और समयबद्ध मरम्मत व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।








