जनवरी से अंधेरे में था घर, 16 मार्च के न्यायालयीय आदेश के बावजूद नहीं हुई थी कार्रवाई—11 अगस्त को विभाग ने जारी किया अनुपालन पत्र
प्रयागराज। जिस मामले को लेकर UPPCL MEDIA ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PUVVNL) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, उसमें आखिरकार विभाग को अपना कदम उठाना पड़ा। 75 वर्ष से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिला श्रीमती निन्द्रा देवी के विद्युत कनेक्शन को आखिरकार 11 अगस्त 2026 को बहाल कर दिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र स्वयं इस बात का दस्तावेजी प्रमाण है कि माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के 16 मार्च 2026 के आदेश के अनुपालन में कनेक्शन बहाल किया गया है।
यानी सवाल अब भी वही है—अगर न्यायालय का आदेश 16 मार्च को आ चुका था, तो आदेश के अनुपालन में कनेक्शन 11 अगस्त तक क्यों लटका रहा?

UPPCL MEDIA ने उठाया सवाल तो विभाग में मची हलचल
पूरा मामला सामने आने के बाद UPPCL MEDIA ने संबंधित विभाग और जोन को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि कनेक्शन बहाली के पीछे कोई वैध कारण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए और यदि कोई वैध कारण नहीं है तो बुजुर्ग उपभोक्ता का कनेक्शन तत्काल बहाल किया जाए।
इसके बाद विभागीय स्तर पर अचानक तेजी दिखाई दी और 11 अगस्त 2026 को कनेक्शन संख्या 4072506000 बहाल कर दिया गया।
इसे महज संयोग कहा जाए या UPPCL MEDIA की खबर और चेतावनी का असर—लेकिन इतना जरूर है कि जिस मामले में महीनों तक कार्रवाई नहीं हुई, उसमें चेतावनी के बाद कार्रवाई अचानक हो गई।
विभाग का अपना दस्तावेज खोल रहा है पूरी पोल!
अधिशासी अभियंता, विद्युत नगरीय वितरण खण्ड, रामबाग, प्रयागराज द्वारा जारी पत्रांक 5170, दिनांक 11.08.2026 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि मामला सिविल रिट याचिका संख्या 5481/2026, श्रीमती निन्द्रा देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं 02 अन्य से संबंधित है।
माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने 16.03.2026 को आदेश पारित किया था। आदेश के माध्यम से कनेक्शन संख्या 4072506000 को पुनः बहाल करने के लिए निर्देशित किया गया था।
विभागीय पत्र के अनुसार पुराने एसोसिएशन नंबर PU_64610 को भौतिक रूप से लेजराइज करते हुए कनेक्शन को 11.08.2026 को बहाल कर दिया गया। पत्र के अंत में विभाग ने स्वयं कहा है कि 16.03.2026 के न्यायालयीय आदेश का अनुपालन किया जाता है।
अब विभाग के इस दस्तावेज से सबसे बड़ा सवाल यही निकलता है—
16 मार्च का आदेश… और 11 अगस्त को अनुपालन! आखिर बीच के करीब पांच महीने कहां चले गए?
बुजुर्ग उपभोक्ता का सवाल भी कम बड़ा नहीं
यह मामला किसी सामान्य कागजी प्रक्रिया का नहीं था। मामला एक 75 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग महिला से जुड़ा था।
यदि उपभोक्ता पक्ष के अनुसार बिजली बिल का कोई बकाया नहीं था और दूसरी ओर न्यायालय द्वारा कनेक्शन बहाली का आदेश भी दिया जा चुका था, तो फिर इतनी लंबी देरी का कारण क्या था?
क्या विभाग के अधिकारियों ने न्यायालय के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया?
क्या आदेश के अनुपालन के लिए मीडिया की दस्तक जरूरी थी?
क्या किसी बुजुर्ग उपभोक्ता को अपने वैध अधिकार के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ेगा?
इन सवालों का जवाब अब विभाग को देना चाहिए …
कनेक्शन बहाल होने के बाद बुजुर्ग उपभोक्ता ने UPPCL MEDIA को दिया धन्यवाद
कनेक्शन बहाल होने के बाद बुजुर्ग उपभोक्ता की ओर से UPPCL MEDIA का तहे दिल से धन्यवाद किया गया।
यह धन्यवाद सिर्फ एक मीडिया संस्थान के लिए नहीं, बल्कि उस सवाल के लिए भी है जो इस पूरे प्रकरण में उठाया गया था—
“अगर व्यवस्था आम उपभोक्ता के लिए है, तो न्यायालय के आदेश के बाद भी एक बुजुर्ग महिला को बिजली के लिए इंतजार क्यों करना पड़ा?”
विभाग के लिए यह कनेक्शन बहाली राहत नहीं, आईना है!
विभाग ने आखिरकार कनेक्शन बहाल कर दिया—यह उपभोक्ता के लिए राहत की बात है। लेकिन कनेक्शन बहाल होने से उन सवालों का अंत नहीं हो जाता जो इस मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर खड़े किए हैं।

बल्कि अब विभाग से यह पूछा जाना चाहिए कि—
16.03.2026 के आदेश के बाद तत्काल अनुपालन क्यों नहीं हुआ?
कनेक्शन जनवरी 2026 से बंद रहने की वास्तविक वजह क्या थी?
न्यायालयीय आदेश के अनुपालन में लगभग पांच महीने क्यों लगे?
क्या इस देरी के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई?
क्या प्रदेश में ऐसे अन्य मामले भी हैं, जहां न्यायालयीय आदेशों के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत के लिए इंतजार करना पड़ रहा है?
UPPCL MEDIA का सवाल—अब जवाब भी चाहिए!
विभाग ने कनेक्शन बहाल करके फिलहाल अपनी किरकिरी जरूर टाल दी है, लेकिन सवाल अभी खत्म नहीं हुआ। एक बुजुर्ग महिला का कनेक्शन बहाल करना विभाग का एहसान नहीं, बल्कि न्यायालयीय आदेश का अनुपालन और उपभोक्ता का अधिकार है।
अगर UPPCL MEDIA के सवाल उठाने के बाद कार्रवाई में तेजी आई, तो यह भी विभाग के लिए आत्ममंथन का विषय है कि आखिर मीडिया की चेतावनी से पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई…. फाइल बंद नहीं हुई है… अब सवाल जवाबदेही का है।
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