75 KW का जबरन कनेक्शन, 5 लाख का बिल और कटी हुई लाइन! कुशीनगर में किसके इशारे पर चल रहा बिजली विभाग का खेल?

हल्दी प्लांट ने मांगा था 20 किलोवाट, विभाग ने थोप दिया 75 किलोवाट का कनेक्शन; बिजली इस्तेमाल नहीं हुई, फिर भी वसूला लाखों का फिक्स चार्ज

कुशीनगर के दुदही में सरकारी योजनाओं के तहत स्थापित हल्दी प्रसंस्करण प्लांट आज बिजली विभाग की कार्यशैली का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। जिस प्लांट को रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने का केंद्र बनना था, वह विभागीय मनमानी और अफसरशाही की भेंट चढ़ गया।

जानकारी के अनुसार उपभोक्ता ने मात्र 20 किलोवाट का विद्युत संयोजन मांगा था, लेकिन बिजली विभाग ने बिना आवश्यकता और बिना औचित्य बताए 100 KVA ट्रांसफार्मर लगाकर 75 किलोवाट का कनेक्शन जारी कर दिया। सवाल यह है कि जब मांग 20 किलोवाट की थी तो 75 किलोवाट का भारी-भरकम लोड किसके हित में स्वीकृत किया गया?

पत्र लिखने की सजा: लाइन ही काट दी!

जब उद्यान विभाग ने इस विसंगति को लेकर बिजली अधिकारियों को पत्र लिखा तो समस्या का समाधान करने के बजाय विभाग ने अगस्त 2025 से ही बिजली लाइन काट दी। ऐसा प्रतीत होता है मानो शिकायत करना ही सबसे बड़ा अपराध हो।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संयोजन मिलने से लेकर लाइन काटे जाने तक उपभोक्ता ने बिजली का उपयोग ही नहीं किया, क्योंकि उसे आवश्यकतानुसार लोड उपलब्ध नहीं कराया गया था। वह लगातार 20 किलोवाट संयोजन की मांग करता रहा लेकिन विभाग 75 किलोवाट का बोझ थोपता रहा।

मशीनों में लग रही जंग, योजना हो रही बर्बाद

हल्दी प्लांट में लगी सभी मशीनें बिजली आधारित थीं। बिजली उपलब्ध न होने और विभागीय जिद के कारण मशीनें बंद पड़ी रहीं और अब उनमें जंग लगने लगी है।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि प्लांट संचालकों को मजबूर होकर अलग से ऐसी मशीनें मंगानी पड़ीं जो लकड़ी और गोबर के ईंधन से संचालित होती हैं। करोड़ों रुपये की सरकारी योजना आखिर किसकी लापरवाही से इस हाल में पहुंची?

विभाग से  बिजली नहीं जली, फिर भी 5 लाख का बिल!

यह मामला यहीं नहीं रुकता। जिस कनेक्शन का उपयोग नहीं हुआ, जिसकी लाइन विभाग खुद काट चुका है, उसी कनेक्शन पर केवल फिक्स चार्ज के नाम पर लगभग 5 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया।

विभाग से  यूपीपीसीएल से सीधा सवाल है—

➡️ जब बिजली विभाग ने खुद लाइन काट रखी है तो फिक्स चार्ज किस बात का?

➡️ जब उपभोक्ता ने 20 किलोवाट मांगा था तो 75 किलोवाट का फिक्स चार्ज क्यों वसूला जा रहा है?

➡️ क्या उपभोक्ता की सहमति के बिना अतिरिक्त भार थोपना नियमों के अनुरूप है?

➡️ यदि संयोजन गलत था तो जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?

सरकारी विभाग ही सरकारी विभाग को लगा रहा चूना?

इस पूरे प्रकरण में सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि एक सरकारी विभाग द्वारा स्थापित परियोजना को दूसरा सरकारी विभाग ही आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है। जनता के टैक्स से बनी योजना बर्बाद हो रही है और जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं हैं।

फोन तक नहीं उठाते अधिकारी

स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों का आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। शिकायतों का समाधान तो दूर, संवाद करने की भी जहमत नहीं उठाई जा रही।

UPPCL MEDIA का अहम सवाल 

यदि एक सरकारी परियोजना के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम उपभोक्ता की स्थिति क्या होगी?

कुशीनगर में यह केवल एक हल्दी प्लांट का मामला नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही, उपभोक्ता अधिकारों और सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा सवाल है।

  • क्या ऊर्जा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
  • क्या गलत लोड स्वीकृत करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या बिना उपयोग के भेजे गए लाखों रुपये के बिल वापस होंगे?

या फिर फाइलों में दबाकर इस पूरे प्रकरण को भी “सिस्टम की गलती” बताकर भुला दिया जाएगा?

UPPCL MEDIA

"यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

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