हरदोई में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई ने सरकारी भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहाबाद नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर को ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि विद्युत कार्यों के लंबित बिलों के भुगतान के बदले रिश्वत मांगी गई थी।
बिजली से जुड़े कार्यों का भुगतान कराने के लिए यदि ठेकेदारों और फर्मों को घूस देनी पड़े, तो इसका सीधा असर बिजली व्यवस्था, विकास कार्यों और जनता के पैसे पर पड़ता है। सवाल यह है कि जब सरकारी बिलों के भुगतान के लिए भी रिश्वत की मांग होने लगे, तो पारदर्शिता और जवाबदेही का क्या होगा?
शिकायतकर्ता की सूचना पर विजिलेंस ने गोपनीय जांच की और आरोप सही पाए जाने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी अधिकारी ने ₹2 लाख स्वीकार किए, टीम ने उसे दबोच लिया।
तीखा सवाल:
“क्या बिजली और नगर निकायों से जुड़े विकास कार्य अब बिना ‘परसेंटेज’ दिए पूरे नहीं हो सकते? आखिर कब तक भ्रष्ट अधिकारी सरकारी भुगतान को अपनी कमाई का जरिया बनाते रहेंगे?”
“बिजली के काम का भुगतान चाहिए था, अधिकारी को चाहिए थी घूस; विजिलेंस ने दोनों हाथों से खेल रहे सिस्टम पर मारा छापा।”








