ट्रांसफार्मर फूंका… तनख्वाह झोंकी! …. 20 साल पुराने कबाड़ का हिसाब जेई-एई की जेब से, ‘लॉस ऑफ मटेरियल’ बना वेतन वसूली का हथियार

ट्रांसफार्मर फूंका… तनख्वाह झोंकी! 20 साल पुराने कबाड़ का हिसाब कर्मचारियों से क्यों?

‘लॉस ऑफ मटेरियल’ के नाम पर ₹55,714 की रिकवरी, फील्ड में काम करने वाले जेई-एई बने विभागीय नुकसान की भरपाई का जरिया

UPPCL MEDIA BRAKING

कानपुर में करीब 20 साल पुराने रिपेयर ट्रांसफार्मर के इंटरनल फॉल्ट से डैमेज होने पर सहायक अभियंता और अवर अभियंता के वेतन से ₹55,714 की रिकवरी कर ली गई। सैलरी स्लिप में इसे “Loss of Material Recover” का नाम दिया गया।
अब सवाल उठ रहा है — क्या जेई-एई इंजीनियर हैं या विभाग के घाटे की भरपाई का एटीएम?

बिजली विभाग में अब नया नियम चलता दिख रहा है —
उपकरण पुराना हो, सिस्टम जर्जर हो, रखरखाव कमजोर हो, फॉल्ट तकनीकी हो… लेकिन भरपाई कर्मचारी करे!

जिस ट्रांसफार्मर का इंसुलेशन कमजोर, उम्र पूरी, और तकनीकी स्थिति संदिग्ध थी, उसके खराब होने की कीमत अब कर्मचारियों के परिवार क्यों चुकाएं?
वेतन पर पहला हक बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, माता-पिता की दवा और परिवार की जरूरतों का होता है — न कि वर्षों पुराने सिस्टम की नाकामी का।

नए ट्रांसफार्मर पर 5 साल की वारंटी,
लेकिन यहां 20 साल पुराने रिपेयर ट्रांसफार्मर के खराब होने पर ऐसी रिकवरी मानो वह कोई अजर-अमर मशीन थी, जिसे कभी खराब होना ही नहीं चाहिए था!

फील्ड कर्मचारी क्या करे?

  • जनता की शिकायतें सुने…
  • रात-दिन फील्ड में दौड़े…

ऊपर से हर तकनीकी नुकसान की आर्थिक सजा भी भुगते?

आज ₹55,714 कटा है, कल लाखों की रिकवरी का फरमान आया तो? क्या तब कर्मचारी घर बेचकर विभागीय घाटा भरेगा?

UPPCL MEDIA का सीधा सवाल:

क्या विभाग में जवाबदेही तय होगी, या हर खराब ट्रांसफार्मर का बिल कर्मचारियों की सैलरी से ही वसूला जाएगा?

UPPCL MEDIA

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