शाहजहाँपुर। Shahjahanpur में बिजली विभाग की स्मार्ट मीटर योजना अब जनता के गले की फांस बनती जा रही है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर लागू होते ही उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का साफ आरोप है कि बिना सहमति और पर्याप्त जानकारी के जबरन प्रीपेड सिस्टम थोप दिया गया है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा हमला हो रहा है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब बिजली ‘जरूरत’ नहीं बल्कि ‘रिचार्ज’ पर निर्भर हो गई है। जैसे ही बैलेंस खत्म—वैसे ही बिजली गुल। हजारों परिवार अंधेरे में धकेल दिए गए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले वे अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार बिल जमा करते थे, लेकिन अब एडवांस भुगतान की मजबूरी ने घर का बजट बिगाड़ दिया है।
मोबाइल चार्जिंग, बच्चों की पढ़ाई, छोटे व्यापार—हर चीज पर असर पड़ा है। लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था उन्हें 20-30 साल पीछे ले जा रही है, जब बिजली एक सुविधा नहीं बल्कि संघर्ष हुआ करती थी।
गुस्साए उपभोक्ताओं ने इसे “स्मार्ट मीटर नहीं, स्मार्ट लूट” करार दिया है। उनका कहना है कि यह योजना आम जनता को परेशान करने और जबरन वसूली का माध्यम बन गई है।
इसी मुद्दे को लेकर उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में अधिशासी अभियंता कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र रूप लेगा।
यह विरोध केवल शाहजहाँपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे Uttar Pradesh में स्मार्ट मीटर के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में उपभोक्ता सड़कों पर उतर रहे हैं और पुरानी पोस्टपेड व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
📢 अब सवाल यह है कि क्या सरकार और बिजली विभाग जनता की इस पीड़ा को समझेंगे या स्मार्ट मीटर का यह विवाद पूरे प्रदेश में बड़ा जनआंदोलन बन जाएगा?








