केंद्रीय बजट 2026 पर बिजली इंजीनियरों की तीखी प्रतिक्रिया: निजीकरण, महंगी बिजली और सार्वजनिक तंत्र पर खतरे के संकेत

लखनऊ। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर बिजली इंजीनियरों के राष्ट्रीय मंच से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उनका कहना है कि बजट में किए गए प्रावधान ऊर्जा क्षेत्र में “रीस्ट्रक्चरिंग” के नाम पर ऐसे बदलावों की ओर संकेत करते हैं, जो सार्वजनिक विद्युत तंत्र को कमजोर कर निजी कंपनियों की भूमिका को बढ़ा सकते हैं। इसका असर सीधे बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, बेरोजगार युवाओं और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका जताई गई है।

All India Federation of Power Diploma Engineers (AIFOPDE) के अतिरिक्त राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर जय प्रकाश ने कहा कि बजट में Power Finance Corporation (PFC) के माध्यम से राज्य विद्युत इकाइयों के ढांचे में बदलाव और निजीकरण की संभावनाएं दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, वित्तीय तंत्र के जरिए राज्य वितरण कंपनियों को निजी भागीदारी की ओर प्रेरित किया जा सकता है।

इंजीनियर जय प्रकाश का कहना है कि इन प्रावधानों से प्रादेशिक विद्युत नियामक आयोगों के अधिकार सीमित हो सकते हैं और नए टैरिफ प्राविधानों के माध्यम से बिजली दरों में वृद्धि का रास्ता खुल सकता है, जिससे आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम आय वर्ग के आयकरदाताओं, विशेषकर सरकारी कर्मचारियों को किसी प्रकार की कर राहत न मिलना निराशाजनक है, जिससे उनमें असंतोष की भावना बढ़ सकती है।

इंजीनियर जय प्रकाश, जो पूर्व में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं, ने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि यह बजट सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को धीरे-धीरे कमजोर कर निजी घरानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में जाता हुआ प्रतीत होता है।

उनके अनुसार, यदि यह नीति आगे बढ़ती है तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव देशभर के बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, छात्रों और बिजली कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने इस स्थिति को “अत्यंत चिंताजनक” बताते हुए ऊर्जा क्षेत्र में सार्वजनिक हितों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

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