सिर्फ एक जिला में 43 हजार बिजली मीटर खराब, बिना जलाए भी आ रहा साधारण बिल

  • जिले में 43 हजार बिजली मीटर सर्वे में मिले हैं खराब
  • मीटर बदलवाने के लिए उपभोक्ता लगा रहे विद्युत निगम कार्यालय का चक्कर
  • शहर से गांव तक उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी
  • जिले में नए बिजली मीटर की नहीं हुई आपूर्ति, इसलिए परेशान उपभोक्ता
  • बिना जलाए भी आ रहा साधारण बिल, इससे हो रहे और परेशान
  • एक हजार से अधिक कनेक्शन का हर माह लक्ष्य, मीटर नहीं होने विद्युत निगम भी नहीं दे पा रहा कनेक्शन

सिद्धार्थनगर। विद्युत उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए लगाया गया मीटर उनके लिए परेशानी का सबब बना गया है। मीटर में तकनीकी खराबी के कारण या तो बिलिंग गड़बड़ी हो रहा है या फिर बिल ही नहीं आ रहा है। वहीं, कुछ उपभोक्ताओं का बिना जलाए साधारण बिल आ रहा है। यह एक दो नहीं, बल्कि जिले के 43 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की समस्या है। विद्युत निगम के सर्वे में ही मीटर में तकनीकी खराबी की बात सामने आई है। नया मीटर लगाने के लिए उपभोक्ता विद्युत कार्यालय का चक्कर लगाकर परेशान हैं। जिससे उनकी समस्या का निदान हो सके। लेकिन व्यवस्था न होने के कारण दोहरी मार झेल रहे हैं। वहीं, विद्युत निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि मीटर की आपूर्ति ही नहीं हो रही है। ऐसे में मीटर कैसे बदला जाए।

बिजली की चोरी की समस्या दूर हो और लोग जितने बिजली का उपभोग करें, उन्हें उतना ही बिल भुगतान करना पड़े। इसलिए हर उपभोक्ताओं के घरों में बिजली का मीटर लगा दिया गया है। शहर से गांव तक बिजली के मीटर लगा दिए। बिजली बिल के वसूली पर तो जोर दिया जा रहा है। लेकिन नियमित बिल देने और मीटर देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाए उनकी समस्या और बढ़ गई। कारण मीटर में तकनीकी खराबी के की वजह से बिजली का बिल कई गुना बढ़कर आ रहा है। वहीं, कुछ उपभोक्ताओं का बिना जलाए बिल निकल रहा है। मीटर बदलवाने के लिए उपभोक्ता प्रतिदिन कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन मीटर सही नहीं हो रहा है और न ही नया मीटर मिल रहा है। नगर के विद्युत उपकेंद्र पर पहुंचे उसका निवासी रमेश ने कहा कि पहले कई बार बिल गडग़ड़ आया, अब मीटर ही खराब हो गया। तीन माह से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार- बार जा रहा है कि मीटर आएगा तब लगेगा। वहीं, शीला देवी ने बताया कि उनके पति और बेटा बाहर रहते हैं। बिल जमा उन्हीं को करना पड़ता है। कई माह से बिल नहीं आ रहा है, दिखवाया तो पता चला कि मीटर ही खराब है। बदलने के लिए लाइनमैन से लेकर कार्यालय तक चक्कर लगा चुकी हूं, लेकिन मीटर नहीं बदला। बहुत परेशानी है। ऐसी ही अन्य विद्युत सब स्टेशन डुमरियागंज और बांसी में भी है। जहां उपभोक्ता मीटर बदलवाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं।

मीटर नहीं तो आ रहा साधारण बिल
विद्युत मीटर बंद होने के बाद ऐसा नहीं है कि कम बिजली जलाए तो कम देना पड़ेगा। सही पर जिस रेसिया से बिजली का भुगतान करना पड़ता था, उसी के हिसाब से देना पड़ रहा है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को साधारण 500 से अधिक रुपये भुगतान करना पड़ रहा है। किसी- किसी उपभोक्ता तो कई गुना बिल आ जा रहा है।

मीटर के लिए लगा रहे जुगाड़
विभाग से जुड़े एक कर्मी के मुताबिक कुछ लोग मीटर सही करने के नाम पर उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। मीटर आते ही लगा देने का झांसा देकर भी उनका शोषण कर रहे हैं। जबकि मीटर किसी भी सब स्टेशन पर उपलब्ध नहीं है।

जिले में हैं 17687 विद्युत उपभोक्ता
जिले में शहर से गांव तक 3.92 लाख हैं। इसमें 17687 उपभोक्ता एक से पांच किलोवॉट के कनेक्शन धारक हैं। जबकि 1857 उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनका कनेक्शन पांच किलो से अधिक वॉट का है।

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