लखनऊ में नए बिजली कनेक्शन के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने UPI भुगतान का रिकॉर्ड, e-FIR, 1912 शिकायत और विभागीय आदेश के आधार पर जांच की मांग की है। अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद बिजली कनेक्शन जारी होने के बावजूद पूरे प्रकरण में जवाबदेही और कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लखनऊ। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) में नए बिजली कनेक्शन के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार शिकायतकर्ता ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि UPI भुगतान का रिकॉर्ड, विभागीय आदेश, e-FIR, व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। इन दस्तावेजों ने विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायतकर्ता प्रांजल ए. जायसवाल का आरोप है कि 4 किलोवाट बिजली कनेक्शन दिलाने के नाम पर उससे पहले ₹8,000 नकद और बाद में 19 जुलाई 2026 को ₹3,500 UPI के माध्यम से कुल ₹11,500 लिए गए। शिकायत के अनुसार यह राशि दीपक सक्सेना को दी गई, जिसका बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड भी उपलब्ध है। आरोप है कि भुगतान लेने के बाद न तो समय पर बिजली कनेक्शन दिया गया और न ही कोई आधिकारिक रसीद या आवेदन उपलब्ध कराया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने लगातार संपर्क किया तो उसे अतर सिंह से बात करने के लिए कहा गया। कई बार फोन और संदेश भेजने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उसने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी, 1912 पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और अंततः e-FIR भी दर्ज कराई।
मामले में सबसे अहम दस्तावेज 25 अगस्त 2025 का वह विभागीय आदेश है, जिसे अधीक्षण अभियंता, विद्युत नगरीय वितरण मंडल-गोमतीनगर ने जारी किया था। आदेश में 1912 पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के आधार पर लाइनमैन अतर सिंह यादव के विरुद्ध उपभोक्ताओं से धन मांगने की शिकायत का उल्लेख करते हुए उन्हें संबंधित पावर हाउस से हटाकर अन्य स्थान पर तैनात करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि आदेश का प्रभावी पालन नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित संविदाकर्मी केवल लाइनमैन का कार्य नहीं करता था, बल्कि नए कनेक्शन का सर्वे, कनेक्शन की प्रक्रिया, बिजली बिल संशोधन, लोड बढ़ाने और अन्य उपभोक्ता कार्यों में भी उसकी सक्रिय भूमिका थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी कारण उपभोक्ताओं से कथित रूप से मनमानी वसूली की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं।
हालांकि, मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद शिकायतकर्ता को बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा दिया गया। लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल कनेक्शन मिल जाने से मामला समाप्त नहीं हो जाता। उसका आरोप है कि कथित रूप से ली गई धनराशि, विभागीय आदेश की अनदेखी और पूरे प्रकरण में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही अभी भी तय होना बाकी है।

UPPCL MEDIA का मानना है कि यदि किसी उपभोक्ता को अपना वैध बिजली कनेक्शन पाने के लिए शिकायत, भुगतान के साक्ष्य, 1912 पोर्टल, वरिष्ठ अधिकारियों और e-FIR तक का सहारा लेना पड़े, तो यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
(यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों एवं आरोपित व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)








