बैठक से यह भी संकेत मिला कि आगामी दिनों में राजस्व वसूली, लाइन लॉस नियंत्रण और उपभोक्ता सेवा से जुड़े मामलों में जवाबदेही और सख्ती बढ़ सकती है। प्रदर्शन में पीछे रहने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर निगम प्रबंधन की नजरें टिकी हुई हैं।

गोंडा, 03 जून 2026। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के गोंडा मंडल में बुधवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राजस्व वसूली, लाइन लॉस, उपभोक्ता शिकायतों और विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों की जमकर पड़ताल की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने की, जबकि निदेशक (तकनीकी), निदेशक (वाणिज्यिक) तथा क्षेत्रीय मुख्य अभियंता सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार बैठक में सबसे अधिक फोकस उन बिंदुओं पर रहा जिनको लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। राजस्व वसूली की धीमी गति, बढ़ते लाइन लॉस, लंबित शिकायतें तथा फील्ड स्तर पर कार्यों की मॉनिटरिंग को लेकर अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया।
बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट की भी गहन समीक्षा की गई। जिन क्षेत्रों में लक्ष्य के अनुरूप प्रदर्शन नहीं मिला, वहां संबंधित अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार लाने और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए।
प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने फील्ड स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी, राजस्व वृद्धि के साथ बकाया वसूली में तेजी लाने तथा सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
बैठक से यह भी संकेत मिला कि आगामी दिनों में राजस्व वसूली, लाइन लॉस नियंत्रण और उपभोक्ता सेवा से जुड़े मामलों में जवाबदेही और सख्ती बढ़ सकती है। प्रदर्शन में पीछे रहने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर निगम प्रबंधन की नजरें टिकी हुई हैं।
सवाल जो अब भी कायम हैं…
- क्या समीक्षा बैठकों के निर्देश जमीनी स्तर पर दिखाई देंगे?
- क्या उपभोक्ताओं की लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान होगा?
- क्या बढ़ते लाइन लॉस और बकाया वसूली की चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण हो पाएगा?
- क्या फील्ड स्तर की मॉनिटरिंग केवल बैठकों तक सीमित रहेगी या परिणाम भी नजर आएंगे?
गोंडा समीक्षा बैठक ने साफ संकेत दे दिया है कि निगम प्रबंधन अब केवल आंकड़ों से संतुष्ट नहीं होगा, बल्कि मैदान में दिखाई देने वाले परिणामों पर ही अधिकारियों की कार्यकुशलता का आकलन किया जाएगा।







