लुहारी बिजलीघर में ‘एस्टिमेट’ का खेल? अवैध लाइन/ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग पर घूस के गंभीर आरोप, 7 माह से कार्रवाई ठप

शिकायतकर्ता का दावा—IGRS, ईमेल, जांच समिति, फोटो-वीडियो सब मौजूद; फिर भी विभागीय चुप्पी

फिरोजाबाद से बड़ी खबर | UPPCL MEDIA

फिरोजाबाद जनपद के लुहारी बिजलीघर क्षेत्र से बिजली विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली शिकायत सामने आई है। ग्राम लुहारी निवासी शिकायतकर्ता सुरेश पुत्र राम प्रकाश का आरोप है कि क्षेत्र में बिना एस्टिमेट के लाइन निर्माण, ट्रांसफार्मर रखने/शिफ्ट करने और उपभोक्ताओं से धन लेने जैसे काम नियमों के विरुद्ध किए गए, लेकिन महीनों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जुलाई 2025 से अब तक IGRS और ईमेल के माध्यम से कई बार साक्ष्यों सहित शिकायतें भेजी गईं। एक जांच समिति भी बनी, 20 दिसंबर 2025 को स्थलीय निरीक्षण हुआ और फोटो लिए गए—फिर भी परिणाम शून्य है।

क्या हैं प्रमुख आरोप? (शिकायत के आधार पर)

  • बिना एस्टिमेट के 10 KV के ट्रांसफार्मर अलग-अलग स्थानों पर रखे गए।
  • 25 KV ट्रांसफार्मर को एक स्थान से दूसरे स्थान शिफ्ट किया गया, खंभे भी लगाए गए—एस्टिमेट नहीं।
  • एक स्थान पर LT लाइन को HT लाइन में बदलने का आरोप।
  • उपभोक्ता से “एस्टिमेट जमा” के नाम पर लगभग ₹1,00,000 लेने का दावा, जबकि विभाग में राशि जमा न होने का आरोप।
  • प्रत्येक ट्रांसफार्मर स्थापना/शिफ्टिंग पर ₹40,000–₹60,000 तक अवैध वसूली के आरोप।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इन कार्यों के फोटो-वीडियो साक्ष्य उसके पास हैं।

जांच हुई, कार्रवाई क्यों नहीं?

दावे के मुताबिक, तत्कालीन अधिकारियों द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। निरीक्षण भी हुआ, तथ्यों की पुष्टि भी बताई गई—लेकिन सात माह बाद भी किसी पर विभागीय कार्रवाई नहीं दिखती। शिकायतकर्ता का आरोप है कि साक्ष्यों को धीरे-धीरे हटाने/बदलने की कोशिश की जा रही है।

उच्च अधिकारियों पर भी सवाल

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पूर्व व वर्तमान जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। कुछ अधिकारियों पर “बचाने” के प्रयास के आरोप भी लगाए गए हैं। (इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है।)

उपभोक्ता हित पर चोट?

शिकायतकर्ता के अनुसार, एक गरीब किसान उपभोक्ता से एस्टिमेट के नाम पर धन लिया गया, जबकि न एस्टिमेट बना और न राशि विभाग में जमा हुई। यदि यह सही है तो यह उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

शिकायतकर्ता की मांग

  • निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच
  • संबंधित कर्मियों/अधिकारियों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई
  • साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश
  • उपभोक्ता से लिए गए धन की जांच और वापसी

विभाग का पक्ष

इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।

जांच अधिकारी का बयान सामने आया

प्रकरण की जांच कर रहे अधिकारी रजत शुक्ला ने UPPCL MEDIA से बातचीत में कहा:

“अब तक शिकायतकर्ता हमारे सीधे संपर्क में नहीं आया है। हमारे पास जो दस्तावेज पहुंचे हैं, वे कई बिंदुओं पर गुमराह करने वाले प्रतीत होते हैं। हालांकि एक-दो स्थानों पर प्राथमिक स्तर पर यह संकेत मिला है कि उपखंड अधिकारी प्रवीण द्वारा त्रुटि हुई हो सकती है, लेकिन आसपास के लोगों के बयान एक जैसे और रटे-रटाए लगते हैं, जिससे संदेह की स्थिति बनती है।

यदि शिकायतकर्ता अतिरिक्त/मौलिक दस्तावेज उपलब्ध कराता है, तो मामले का जल्द खुलासा संभव है। जांच अभी जारी है।”

अब तस्वीर के दो पक्ष

  • शिकायतकर्ता का दावा: साक्ष्य, फोटो-वीडियो, IGRS, ईमेल, जांच निरीक्षण—सब मौजूद, फिर भी कार्रवाई नहीं।
  • जांच अधिकारी का पक्ष: उपलब्ध दस्तावेज भ्रामक, शिकायतकर्ता संपर्क में नहीं; अतिरिक्त प्रमाण मिलने पर तेजी संभव।

UPPCL MEDIA का सवाल

क्या शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी के बीच सीधा समन्वय न होना ही देरी की वजह है?
क्या अतिरिक्त दस्तावेज मिलने के बाद जांच की दिशा बदलेगी?

(नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ों/दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र/न्यायिक पुष्टि शेष है।)

  • UPPCL MEDIA

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