लखनऊ (UPPCL MEDIA विशेष रिपोर्ट)
राजधानी लखनऊ में उजागर हुए 30 किलोवाट बिजली चोरी और ₹2 लाख रिश्वत लेकर मामला दबाने के सनसनीखेज प्रकरण को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक शून्य है। न प्राथमिकी दर्ज हुई, न विभागीय जांच शुरू हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी से जवाब-तलब किया गया।

सेस-2 खंड अंतर्गत एफसीआई उपकेंद्र के तत्कालीन उपखंड अधिकारी इंजीनियर संतोष पाठक पर बुद्धेश्वर स्थित कुमार मेडिकल स्टोर में 30 किलोवाट बिजली चोरी पकड़ने के बाद मोटी रिश्वत लेकर मामला रफा-दफा करने का आरोप लगा था। चेकिंग के दौरान का वायरल वीडियो आज भी मौजूद है, जिसमें स्वयं उपखंड अधिकारी विद्युत खपत की गणना करते और चोरी पकड़े जाने की बात स्वीकार करते नजर आ रहे हैं।

इसके बावजूद हैरानी की बात यह है कि—
- आज तक चोरी की प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई,
- चेकिंग रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नहीं भेजी गई,
- और न ही आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
सूत्रों का दावा है कि ₹2 लाख लेकर पूरा मामला दबा दिया गया। यदि ऐसा नहीं है तो विभाग अब तक मौन क्यों है? आखिर किसके संरक्षण में यह भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है?
UPPCL MEDIA के अनुसार, वीडियो सबूतों के बावजूद प्रकरण को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया गया है। यह केवल एक उपभोक्ता या एक इंजीनियर का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करने वाला उदाहरण है, जहां बिजली चोरी पकड़ने के बाद भी चोर और भ्रष्ट अधिकारी दोनों बेखौफ घूम रहे हैं।
राजधानी लखनऊ से उठता यह सवाल अब पूरे प्रदेश में गूंज रहा है—
- क्या रामराज्य के दावों के बीच भ्रष्टाचारियों के लिए कोई कानून नहीं?
- क्या 30 किलोवाट की चोरी और ₹2 लाख की रिश्वत विभाग की नजर में कोई अपराध नहीं?
महीनों बीत गए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जीरो — यही है आज की व्यवस्था की सबसे कड़वी सच्चाई।








