यूपीपीसीएल मीडिया | विशेष रिपोर्ट
रामपुर, उत्तर प्रदेश। सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। दिल्ली–नैनीताल हाईवे-87 पर पहाड़ी फाटक के पास बड़ा हादसा सामने आया है। सरकारी कार्यालय के एसडीओ की बोलेरो पर ओवरलोड भूसा लदा ट्रक पलट गया। हादसा इतना भीषण था कि बोलेरो को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और यातायात ठप हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रक जरूरत से कहीं अधिक भूसे से लदा था। तेज रफ्तार और असंतुलन के चलते ट्रक डिवाइडर से टकराया और पलटते ही बोलेरो पर आ गिरा। चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसने ओवरलोडिंग पर सरकारी दावों की पोल खोल दी है।
🔴 “कार्रवाई के दावे, सड़क पर मौत”
सरकार ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्ती की बात करती है, लेकिन हाईवे पर दौड़ते ऐसे ट्रक रोज़ नियमों को रौंदते दिखते हैं। नतीजा—बेगुनाह जानें। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाह निगरानी और ढीले प्रवर्तन का सीधा परिणाम है।





पुलिस का बयान
पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र के अनुसार प्राथमिक जांच में सामने आया कि फिरासत बोलेरो से कहीं जा रहे थे, तभी पहाड़ी गेट पर ट्रक पलट गया और बोलेरो उसकी चपेट में आ गई। बोलेरो में अकेले फिरासत सवार थे, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई।

मौके पर हालात
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सीओ सिटी जितेंद्र कुमार टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे
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दुर्घटना के बाद आवागमन पूरी तरह ठप
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कई क्रेनों की मदद से ट्रक हटाया गया, तब जाकर यातायात बहाल हुआ
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ट्रक चालक फरार, पुलिस तलाश में जुटी
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बोलेरो पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ मिला; मोबाइल नंबर के आधार पर परिजनों से संपर्क
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शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ट्रक पुलिस कब्जे में
❗ सवाल जो जवाब मांगते हैं
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ओवरलोडिंग चेकिंग आखिर कहां फेल हो रही है?
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हाईवे पर ऐसे ट्रक किसकी शह पर दौड़ते हैं?
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क्या हर मौत के बाद भी कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगी?
यूपीपीसीएल मीडिया का तीखा सवाल:
जब तक ओवरलोडिंग पर नामजद कार्रवाई, जवाबदेही तय और मैदानी निगरानी नहीं होगी—तब तक हाईवे पर ऐसे हादसे थमने वाले नहीं।
एक और परिवार उजड़ गया… क्या अब भी सिस्टम जागेगा?









