“सीतापुर: 20 दिन से बिजली गुल, JE निलंबित – मंत्री धरने पर बैठे, वीडियो वायरल”

सीतापुर जिले के हरगांव क्षेत्र के कोरैया उदनापुर गांव में करीब 20 दिनों से ट्रांसफार्मर खराब पड़ा था, जिससे ग्रामीण अंधेरे में जीने को मजबूर थे। ग्रामीणों की फरियाद पर जब इसकी भनक कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही को लगी, तो गाँव में हड़कंप मच गया। मंत्री खुद गाँव पहुंचे और जूनियर इंजीनियर रमेश मिश्रा से बात की — लेकिन बात क्या हुई, विवाद में बदल गई।

जूनियर इंजीनियर ने मंत्री से उपेक्षापूर्ण लहजे में बात की, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। गांव वालों का आक्रोश बढ़ा, मंत्री खुद धरने पर बैठ गए — और सीधे UPPCL अध्यक्ष और एमडी से कार्रवाई की माँग की।

बताते चले कि इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब हरगांव सीट से बीजेपी विधायक व कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही ने बताया कि ग्रामीण 15 दिनों से ट्रांसफार्मर बदलने की फरियाद कर रहे थे लेकिन विभाग के अफसरों ने कोई सुनवाई नहीं की। जब उन्होंने मध्यांचल बिजली निगम की एमडी रिया केजरीवाल से बात करने की कोशिश की तो उनका फोन तक नहीं उठाया गया। जूनियर इंजीनियर रमेश मिश्रा ने राज्यमंत्री से फोन पर अभद्रता करते हुए कह दिया कि आप स्वयं आकर ट्रांसफार्मर बदल लीजिए। इस पर नाराज मंत्री पिकअप, रस्सी और ग्रामीणों की मदद से खुद ट्रांसफार्मर उतारने नाराज राज्यमंत्री ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं संग ट्रांसफार्मर उतारने पहुंच गए। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के संज्ञान लेने के बाद जूनियर इंजीनियर रमेश मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है।

ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा ने तुरंत एक्स (ट्विटर) पर घोषणा की —
“जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा!” ये सिर्फ लापरवाही नहीं, अनुशासनहीनता है।”जनता की शिकायतों के प्रति असंवेदनशीलता या कदाचार के लिए कठोर दंड दिया जाएगा।”और उसी रात जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया।

अहम सवाल यह कि क्या ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को विभाग में नियुक्ति, ट्रांसफर या निलंबन जैसे करवाई करने का अधिकार है… यदि नहीं तो कैसे इस प्रकार की कार्रवाई करने की घोषणा कर सकते हैं?

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