भारी मात्रा में पुलिसकर्मीयों… सीआरपीएफ जवानों के बीच 10 राज्यों के बिजली कर्मचारियों ने किया निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, 29 मई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करने का प्रस्ताव पारित

लखनऊ। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मी बुधवार को सड़क पर उतरे। उन्होंने शक्तिभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। साथ ही बिजली कर्मियों ने फील्ड हॉस्टल से शक्ति भवन तक विशाल रैली निकाली। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में जमकर हंगामा किया। इस विरोध प्रदर्शन में 10 राज्यों के 5 हजार से अधिक कर्मचारी शामिल हुए। सभी शक्ति भवन के सामने सड़क पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। हैरानी का विषय यह था कि इस विरोध प्रदर्शन में कई इंजीनियर्स शामिल नहीं हो पाये, क्योंकि तथाकथित अध्यक्ष आशीष गोयल के साथ समीक्षा बैठक में शामिल थे।

पावर कारपोरेशन के तथाकथित अध्यक्ष आशीष गोयल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कारियों ने कहा- भ्रष्टाचारी आशीष गोयल कुर्सी छोड़ो। प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए 5 थानों की पुलिस बुलाई गई। भीड़ अधिक होने के कारण सीआरपीएफ जवानों को भी तैनात किया गया।

पुलिस के साथ फोर्स भी स्थिति को संभालने में जुटी रही। शक्तिभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदेशभर से आए बिजली कर्मियों ने फील्ड हॉस्टल से शक्ति भवन तक विशाल रैली निकाली। फिर आम सभा में 29 मई से कार्य बहिष्कार करने का प्रस्ताव पारित किया गया। ऐलान किया कि निजीकरण वापस न होने तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। कार्य बहिष्कार से पूर्व 16 से 30 अप्रैल तक जनजागरण अभियान चलेगा।

निजीकरण के खिलाफ बड़ा आन्दोलन होगा। 29 मई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का किया जाएगा। इसके पहले, 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जन-जागरण अभियान चलेगा। इसके तहत, सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। विरोध सभा आयोजित की जाएगी। 1 मई को मजदूर दिवस के अवसर पर बाईक रैली निकाली जाएगी, और 2 से 9 मई तक क्रमिक अनशन होगा। इसके बाद 14 से 19 मई तक नियमानुसार कार्य आन्दोलन और 20 मई को व्यापक विरोध प्रदर्शन होगा। 21 मई से 28 मई तक तीन घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों का कहना है- हम लोग पिछले चार महीने से अपनी आवाज उठा रहे हैं। कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी कर चुके हैं, इसके बाद भी अभी तक निजीकरण के नियमों में किसी तरह के बदलाव नहीं किए गए हैं। अब यह बर्दाश्त से बाहर है। प्रक्रिया नहीं रुकी इसलिए लखनऊ की सड़क पर उतरे हैं।

मंगलवार को नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स की आंदोलन को लेकर बैठक हुई थी। इसमें फैसला लिया गया था कि अगर सरकार अब भी निजीकरण वापस नहीं लेती है तो कर्मचारी आंदोलन करेंगे।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया- शहरी और ग्रामीण इलाकों में भेदभाव किया जा रहा है। शहर में 24 घंटे बिजली दी जाती है, लेकिन गांवों में 10-12 घंटे ही बिजली दी जाती है। क्योंकि कॉमर्शियल कनेक्शन में ज्यादा और डोमेस्टिक कनेक्शन में कम पैसे मिलते हैं।

सरकार ने एग्रीमेंट किया था कि 54 महीने में खुद का बिजली घर लगाकर पावर सप्लाई की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन 32 साल बाद भी कंपनी खुद का बिजली घर नहीं लगा पाई है। कई सालों तक पावर कॉरपोरेशन महंगी बिजली खरीद कर उन्हें सस्ते में देती रही। अब जाकर यहां की कंपनी खुद से बिजली की व्यवस्था कर रही है।

2023-24 के आंकड़ों के अनुसार कानपुर और आगरा की कंपनियों की तुलना कर लें तो सारा खेल समझ में आ जाएगा। कानपुर की कंपनी बिजली बेच कर उपभोक्ताओं से औसतन 7.96 रुपए प्रति यूनिट वसूलती है। जबकि आगरा की टोरेंट कंपनी को यूपी कॉर्पोरेशन कंपनी 5.55 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर 4.36 रुपए प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध कराती है।

सरकार के फैसले को लेकर होने वाली रैली में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, लद्दाख, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए है। करीब 10000 से अधिक लोग जुटे हैं।

  • UPPCL MEDIA

    "यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

    OTHER UPPCL MEDIA PLATFORM NEWS

    संविदाकर्मी पर मेहरबानी या सिस्टम की मिलीभगत? जानकीपुरम में ‘डुअल रोल’ का बड़ा खेल उजागर

    जानकीपुरम ज़ोन के बिजली विभाग में सामने आया यह मामला सिर्फ एक संविदाकर्मी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही…

    🔥 स्मार्ट मीटर: सुविधा या साजिश? विभाग के दावों पर उठे सवाल

    ⚡ स्मार्ट मीटर योजना पर उठे सवाल, ऐप और कमीशन को लेकर नई चर्चा लखनऊ | विशेष रिपोर्ट (यूपीपीसीएल मीडिया) उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के नाम…

    संविदाकर्मी पर मेहरबानी या सिस्टम की मिलीभगत? जानकीपुरम में ‘डुअल रोल’ का बड़ा खेल उजागर

    संविदाकर्मी पर मेहरबानी या सिस्टम की मिलीभगत? जानकीपुरम में ‘डुअल रोल’ का बड़ा खेल उजागर

    गोंडा में हाईटेंशन तार बना मौत का जाल: 10 साल की अनदेखी ने ली पत्रकार की जान, यूपीपीसीएल की लापरवाही पर उठा बड़ा सवाल

    गोंडा में हाईटेंशन तार बना मौत का जाल: 10 साल की अनदेखी ने ली पत्रकार की जान, यूपीपीसीएल की लापरवाही पर उठा बड़ा सवाल

    फर्जी तरीके से नौकरी पाने का मामला गरमाया — जांच के घेरे में जेई और तकनीशियन, विभाग में मचा हड़कंप

    फर्जी तरीके से नौकरी पाने का मामला गरमाया — जांच के घेरे में जेई और तकनीशियन, विभाग में मचा हड़कंप

    स्मार्ट मीटर पर संग्राम: इटौंजा की घटना ने खोली समन्वयहीनता और अव्यवस्था की पोल

    स्मार्ट मीटर पर संग्राम: इटौंजा की घटना ने खोली समन्वयहीनता और अव्यवस्था की पोल

    🔴 गोमती नगर में 400 KVA ट्रांसफार्मर चोरी — व्यवस्था पर सवाल, फील्ड इंजीनियरों की मेहनत पर विभागीय नीति भारी

    🔴 गोमती नगर में 400 KVA ट्रांसफार्मर चोरी — व्यवस्था पर सवाल, फील्ड इंजीनियरों की मेहनत पर विभागीय नीति भारी

    सीपीएफ पर दलाली का तंत्र! इलाज के पैसों पर ‘रेट कार्ड’ — कम दो तो फ़ाइल ठंडी, ज़्यादा दो तो फ़ाइल गरम

    सीपीएफ पर दलाली का तंत्र! इलाज के पैसों पर ‘रेट कार्ड’ — कम दो तो फ़ाइल ठंडी, ज़्यादा दो तो फ़ाइल गरम
    WhatsApp icon
    UPPCL MEDIA
    Contact us!
    Phone icon
    UPPCL MEDIA
    Verified by MonsterInsights