गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में बिजली विभाग की कथित वसूली और भारी-भरकम बकाया बिल से परेशान एक गरीब पान दुकानदार ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। सैदपुर थाना क्षेत्र के मुरादचक गांव निवासी 55 वर्षीय सुरेंद्र कश्यप की मौत के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है। घर से मिले सुसाइड नोट में सुरेंद्र ने सीधे तौर पर बिजली विभाग को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद मंगलवार को जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। DM ने परिवार को हर संभव सरकारी सहायता और मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
सुसाइड नोट में लिखा- बिजली विभाग से परेशान होकर उठा रहा हूं यह कदम
पुलिस को सुरेंद्र के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा गया है कि वह बिजली विभाग की प्रताड़ना और लगातार दबाव से परेशान होकर यह कदम उठा रहे हैं। नोट सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
1.12 लाख का बिल बना मौत की वजह?
परिजनों के अनुसार सितंबर 2025 में बिजली विभाग की विजिलेंस टीम ने जांच के बाद सुरेंद्र के नाम 1 लाख 12 हजार रुपए का बिजली बिल जारी किया था। कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद परिवार उधार लेकर किस्तों में भुगतान करता रहा, लेकिन बकाया खत्म नहीं हुआ। इसके बाद लगातार नोटिस और राजस्व वसूली की कार्रवाई ने परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं।
मृतक की पत्नी ज्ञानती देवी का आरोप है कि विभाग के कुछ लोगों ने मामला निपटाने के नाम पर 50 हजार रुपए की मांग भी की थी। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दो बेटियों की शादी बाकी, घर चलाने के लिए थी छोटी सी पान गुमटी
सुरेंद्र कश्यप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक छोटी सी पान गुमटी चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार में पत्नी, दो बेटे और दो अविवाहित बेटियां हैं। आर्थिक तंगी के कारण दोनों बेटे मजदूरी के लिए बाहर काम करते हैं। बेटियों की शादी की चिंता और ऊपर से लाखों का बिजली बिल सुरेंद्र को अंदर ही अंदर तोड़ रहा था।
जहर खाने के बाद अस्पताल में मौत
सोमवार सुबह सुरेंद्र ने घर में सल्फास खा लिया। गंभीर हालत में उन्हें सैदपुर सीएचसी ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
UPPCL का पक्ष
विद्युत वितरण खंड तृतीय के अधिशासी अभियंता ई. सुधाकर ने कहा कि उपभोक्ता पर लंबे समय से बिजली बिल बकाया था। वसूली प्रक्रिया के तहत आरसी जारी कर मामला राजस्व अमीन को भेजा गया था। विभाग का कहना है कि नियमानुसार कार्रवाई की गई थी।
बड़ा सवाल
क्या एक गरीब पान दुकानदार पर 1.12 लाख रुपए के बिजली बिल की वसूली का दबाव इतना बढ़ गया कि उसने मौत को गले लगा लिया? अगर परिवार के आरोप सही हैं तो क्या वसूली के नाम पर संवेदनहीनता की गई? और अगर नहीं, तो फिर एक व्यक्ति को आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर आखिर किसने मजबूर किया?
अब पूरे मामले की जांच पुलिस और प्रशासन के सामने है, लेकिन सुरेंद्र कश्यप की मौत ने UPPCL की वसूली व्यवस्था और गरीब उपभोक्ताओं के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।








