मुख्यालय के आदेश को ठेंगा दिखाकर अधीक्षण अभियंता ने किया तीन अवर अभियंताओं का निलंबन, विभाग में मचा हड़कंप

🔥 “नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई!”

अधीक्षण अभियंता ने फिर किया अवर अभियंता का निलंबन — जबकि मुख्यालय के आदेश में अधिकार नहीं!

लखनऊ | UPPCL मीडिया रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के नियम और शासनादेश अब शायद कुछ अधिकारियों के लिए “औपचारिक कागज” बनकर रह गए हैं। इसकी बानगी देखने को मिली मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लि. (MVVNL), लखनऊ ग्रामीण में, जहां के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अभी तक एक नहीं, बल्कि तीन अवर अभियंताओं (Junior Engineers) को निलंबित कर दिया।

ताजा निलंबन आदेश (संख्या 10705/विविनि(रां)/2025 दिनांक 25.10.2025) स्वयं अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल–अमानीगंज, लखनऊ ग्रामीण द्वारा जारी किया गया है। परंतु, नियमों के अनुसार अधीक्षण अभियंता (E.E./S.E.) को इस स्तर की अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है।

लेकिन सवाल यह है कि — क्या अधीक्षण अभियंता (E.E.) को किसी अवर अभियंता (J.E.) को निलंबित करने का अधिकार है? इसका जवाब खुद उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के मुख्यालय से जारी आदेश (संख्या 10-जनश/प्रशा-01/पातालि/2019-21-प्रशा/2001, दिनांक 02.01.2019)** में स्पष्ट है।**

उस आदेश के अनुसार

“स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु अधिकार केवल क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता (वितरण) को प्राप्त हैं, जो अपने क्षेत्र के सहायक अभियन्ताओं तक सीमित हैं।”

अर्थात्, अधीक्षण अभियंता न तो किसी अवर अभियंता का स्थानांतरण कर सकते हैं और न ही निलंबन। यह अधिकार केवल उच्चाधिकारियों (मुख्य अभियंता या उससे ऊपर) को ही है।

फिर भी एक नहीं, बल्कि तीन अवर अभियन्ताओं के निलंबन की कार्रवाई अधीक्षण अभियंता द्वारा की जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, निलंबन आदेश बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के जारी किए गए, जो सेवा नियमों और कॉर्पोरेट शासन प्रणाली की खुली अवहेलना है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह “व्यक्तिगत द्वेष या दबाव की कार्रवाई” प्रतीत होती है। ऊर्जा निगम के अंदरूनी गलियारों में चर्चा गर्म है कि अधीक्षण अभियंता द्वारा इस तरह की कार्रवाई से निचले स्तर के अभियंताओं में भय और असंतोष का माहौल बन गया है।

अब निगाहें निगम मुख्यालय की ओर हैं कि क्या मुख्य अभियंता या एमडी मध्यांचल इस पर संज्ञान लेकर अनुशासनहीनता की जांच करवाएंगे, या फिर एक बार फिर नियम पुस्तिका केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगी।

⚡ “नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला ‘करंट’!- 📜 मुख्यालय का आदेश क्या कहता है?

UPPCL मुख्यालय, लखनऊ द्वारा जारी शासनादेश संख्या 10-जनश/प्रशा-01/पातालि/2019-21-प्रशा/2001 दिनांक 02.01.2019 में स्पष्ट लिखा है —

“क्षेत्रीय मुख्य अभियंता (वितरण) को अपने क्षेत्र के अंतर्गत तैनात सहायक अभियन्ताओं (A.E.) तक के स्थानान्तरण एवं लघु दण्ड देने के अधिकार प्राप्त हैं।”

अर्थात् —

  • यह अधिकार मुख्य अभियंता (Chief Engineer) तक सीमित है।

  • अधीक्षण अभियंता (S.E./E.E.) को न तो स्थानांतरण करने का अधिकार है, और न ही निलंबन करने का। इसके बावजूद, भविष्य कुमार सक्सेना द्वारा यह तीसरी बार ऐसा निलंबन आदेश जारी किया गया है!

⚡ यह कोई पहला मामला नहीं… पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

बताते चलें कि अधीक्षण अभियंता भविष्य कुमार सक्सेना ने इससे पहले —

  • एक जूनियर इंजीनियर आशुतोष को एक कनेक्शन प्रकरण में दोबारा एस्टीमेट बनाने के आरोप में निलंबित किया था,

  • उससे पहले एक अन्य जूनियर इंजीनियर अंगद कुमार को भी निलंबित किया था।

यानी अब तक तीन जूनियर इंजीनियरों को निलंबित करने का “रिकॉर्ड” उनके नाम हो गया है — वो भी बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के!

क्या है मुख्य अभियंता (वितरण) को अपने क्षेत्र के अंतर्गत
तैनात सहायक अभियन्ताओं (A.E.) तक के स्थानान्तरण एवं लघु दण्ड देने के अधिकार

इसके बावजूद, अमानीगंज के अधीक्षण अभियंता ने बार-बार नियमों की अनदेखी करते हुए
तीन अलग-अलग अवर अभियंताओं को निलंबित कर दिया।

⚠️ नियमों से बड़ी “मनमानी”

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन निलंबनों में न तो सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई, न ही संबंधित अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। यह कार्रवाई पूरी तरह एकतरफा और अधिकार-विहीन (ultra vires) है, जो सेवा नियमावली और अनुशासनिक प्रक्रिया की खुली अवहेलना मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, निलंबन के पीछे व्यक्तिगत रंजिश या दबाव की भी चर्चा है। विभागीय अभियंताओं में यह सवाल उठ रहा है कि

“जब मुख्यालय स्वयं स्पष्ट रूप से कह चुका है कि अधीक्षण अभियंता को निलंबन का अधिकार नहीं, तो आखिर यह साहस बार-बार कहां से आता है?”

🔍 अब मुख्यालय की भूमिका पर उठे सवाल

ऊर्जा निगम में चर्चाएं तेज हैं कि यह मामला अब मुख्य अभियंता या प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के संज्ञान में पहुंचेगा या नहीं। यदि उच्चाधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया, तो यह परंपरा पूरे विभाग में “अराजक अनुशासन” को जन्म दे सकती है।

कर्मचारियों के बीच गुस्सा और भय दोनों व्याप्त हैं,
क्योंकि आज यदि अधीक्षण अभियंता अवर अभियंता को बिना अधिकार निलंबित कर सकता है, तो कल किसी और स्तर पर कोई भी अधिकारी इसी तरह “नियमों को तोड़ने” का उदाहरण बना सकता है।

⚡ “करंट” सिर्फ तारों में नहीं, अब फाइलों में भी दौड़ रहा है

ऊर्जा विभाग में यह मामला अब मुख्य अभियंता और प्रबंध निदेशक मध्यांचल की परीक्षा बन गया है।। देखना यह है कि UPPCL मुख्यालय इस “अधिकार दुरुपयोग” पर क्या रुख अपनाता है —
क्योंकि अगर अब भी चुप्पी रही, तो यह विभागीय अनुशासन के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। देखना यह है कि क्या वे नियमों की रक्षा करेंगे या फाइलों में “साइलेंस” बना रहेगा।

🚨 महत्वपूर्ण खुलासा — आवेदक का कोई आवेदन नहीं!

यूपीपीसीएल मीडिया की पड़ताल में इस प्रकरण का एक निर्णायक तथ्य सामने आया है:
👉 जिस आवेदक के साथ कथित वसूली का हवाला दिया जा रहा है, उससे संबंधित कोई आवेदन विभाग में दर्ज नहीं मिला है।

यदि ऐसा कोई आवेदन वास्तव में किया गया था, तो अधीक्षण अभियंता भविष्य कुमार सक्सेना सहित संबंधित अधिकारियों से उस आवेदन की मूल प्रति सार्वजनिक करने का निवेदन किया जाता है।

🔴 यदि ऐसा दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया गया, तो यह कार्रवाई एक सोच-समझकर रची गई चाल मानी जाएगी, और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग अब और भी सशक्त हो उठी है।

यूपीपीसीएल मीडिया इस पूरे मामले की हर कड़ी का दस्तावेज़ीकरण कर सार्वजनिक करेगा —और यदि आवेदन का प्रमाण न मिला, तो हम इस निलंबन आदेश की वैधता पर गंभीर सवाल उठाएंगे।

⚠️ अब उठ रहे बड़े सवाल

  • क्या अधीक्षण अभियंता को इतनी शक्ति किसने दी?

  • क्या यह व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम है?

  • क्या विभागीय मुख्यालय इस मनमानी पर मौन रहेगा?

UPPCL मीडिया | जनता की आवाज़, बिजली व्यवस्था की नब्ज़

⚡ ऊर्जा से जुड़ी हर सच्चाई – बिना डर, बिना दबाव। ऊर्जा व्यवस्था से जुड़े हर सवाल पर हमारी नज़र – क्योंकि बिजली विभाग में “करंट” सिर्फ तारों में नहीं, फाइलों में भी दौड़ता है!
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