आजमगढ़ का मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र बना खतरे का घराना, अधिकारी मौन, जनता परेशान

वाह बिजली वाह! जर्जर तारों और लापरवाह व्यवस्था ने फिर खोली विभाग की पोल

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार रोज़ाना बिजली व्यवस्था को बेहतर बताती है, पर आजमगढ़ के मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र में हकीकत उलटी है। यहाँ बिजली नहीं, बल्कि लापरवाही का करंट दौड़ रहा है। शनिवार दोपहर मोहम्मदपुर उपकेंद्र पर ऐसा हादसा हुआ जिसने विभागीय पोल खोल दी।
दोपहर करीब 12 बजे अचानक उपकेंद्र के अंदर तेज़ धमाका हुआ। लाइन शॉर्ट होने से चिंगारियां उठीं और पूरा परिसर धुएं से भर गया। कुछ मिनटों में मोहम्मदपुर और आसपास के गांवों की सप्लाई ठप हो गई। मौके पर मौजूद कर्मचारी किसी तरह जान बचाकर बाहर भागे।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि “जब खुद उपकेंद्र सुरक्षित नहीं, तो गांवों की सुरक्षा की उम्मीद ही व्यर्थ है।”
रोवा, कोयलाडी, फरिहा, फैजुल्लाहपुर, चौकियां, अमौरा, जमालपुर, रामपुर, अंनदोई, दिलौरी और किशुनपुर समेत कई गांवों की बिजली घंटों बंद रही।

इन घटनाओं में लगातार एक नाम सामने आ रहा है — जेई विनय मौर्य।
ग्रामीणों का आरोप है कि 11000 वोल्ट और एलटी लाइनें बांस-बल्ली पर टिकाई गई हैं, पोल जर्जर हैं और हाईटेंशन तार सिरों के ऊपर से गुजरते हैं, पर विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती।

“हमने जे ई से कहा था कि तार नीचे झुक गए हैं, मगर उन्होंने कहा फंड नहीं है।” – सलीम अहमद, ग्राम कोयलाडी
“हर दिन डर के साये में जीते हैं, कोई भी वक्त मौत बन सकता है।” – प्रमोद यादव, ग्राम फरिहा
“बिजली विभाग सिर्फ फाइलों में मरम्मत दिखाता है, मैदान में कुछ नहीं होता।” – नसीम खान, ग्राम चकियां

विभागीय उदासीनता:
हादसे के बाद भी न कोई अधिकारी मौके पर पहुँचा और न ही जांच दल का गठन हुआ। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि जे ई विनय मौर्य को तत्काल निलंबित किया जाए और पूरे उपकेंद्र की तकनीकी जांच कराई जाए।
यह मामला अब सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सिस्टम की अपराधी चुप्पी बन चुका है।

सवाल यह है – क्या जिम्मेदार अधिकारी तब तक इंतजार करेंगे जब तक कोई मरे नहीं?

जनता का संदेश:
“सरकार के आदेश हवा में, मैदान में मौतें लटका रही हैं।”

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