प्रशासनिक आधार के नाम पर किस प्रकार विभाग को लगाया जाता है चुना…. यह सिर्फ एक नमूना भर

लखनऊ। यह आदेश पत्र संजय कुमार गर्ग… जो की पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में अधीक्षण अभियंता – सामग्री प्रबंधन के पद पर तैनात थे… जिसका स्थानांतरण दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड सेवानिवृत्ति से मात्र 21 दिन पूर्व ही कर दिया।

स्थानांतरण हुआ है, तो ज्वाइन भी करेंगे.. जिसके लिए एक सप्ताह का लगभग समय दिया जाता है…. जिसमें दो दिन रविवार के निकल जाएंगे…. इसके अतिरिक्त एक राजकीय छुट्टी दीपावली पर्व की निकल जाएगी…इसका मतलब है कि वह सिर्फ और सिर्फ 11 दिन ही काम कर पाएंगे।

इसे 11 दिन के लिए घाटे के लिए जाने जाने वाला उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, जो की सरकारी आंकड़े के अनुसार एक लाख करोड़ के घाटे में चल रहा है…. इस अनावश्यक स्थानांतरण के एवज में स्थानांतरण भत्ता के उपरोक्त अधीक्षण अभियंता रूप में जारी करेगा…. यानी कि घाटे में एक और घाटा।

क्या उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन यह बताया कि के उपरोक्त अधिकारी मात्र 11 दिन में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के किस प्रकार से काम आएगा…. ऐसा कौन सा कद्दू में तीर मार देगा कि लाखों रुपए स्थानांतरण भत्ता व माल भाड़ा के रूप में दिया जाए…. और यह सिर्फ नमूना भर है…. इसी तरह कम से कम 20 ऐसे अधिकारी हैं,जिनका मात्र एक माह में ही सेवानिवृत होना था… जिनके ऊपर लाखों रुपए स्थानांतरण भत्ता व माल भाड़ा के रूप में दिया गया।

यही नहीं चार माह में हजारों ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण हुए हैं… जिनका लगभग 2 माह से लेकर 6 माह तक प्रमोशन/सेवानिवृत्ति होना था…. सिर्फ प्रशासनिक आधार के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए… आखिर पावर कारपोरेशन के पास इस प्रकार से आधार विहीन योजना के तहत बिना पॉलिसी के किऐ गए स्थानांतरण पर दिए गए स्थानांतरण भत्ता व माल भाड़ा राशि उपभोक्ताओं से ही वसूला गया होगा अथवा राज्य सरकार द्वारा फंडिंग की गई होगी… हालत जो भी हो इस प्रकार से किए गए स्थानांतरण सिर्फ और सिर्फ पावर कारपोरेशन को जो कि पहले से ही घाटे में चल रही है और घाटे में लाने का प्रयास कर रही है…. जिसकी भरपाई उपभोक्ताओं से बिल में बढ़ोतरी करके अथवा 60 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं को फर्जी बिजली चोरी के आरोप में फंसा कर अवैध तरीके से वसूली करके कर रही है।

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