आरटीआई के जवाब में चौंकाने वाला खुलासा—नियमावली में प्रावधान नहीं, फिर भी कर्मचारियों से कराया जा रहा काम!
लखनऊ। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) के एक आरटीआई जवाब ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त दस्तावेज के अनुसार, आवेदक द्वारा कर्मचारियों से राजस्व वसूली, फील्ड कार्य, साप्ताहिक अवकाश निरस्तीकरण तथा प्रतिकर अवकाश (C-Off) से जुड़े नियमों की जानकारी मांगी गई थी। लेकिन विभाग ने अपने उत्तर में कई मामलों में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि परिचालकीय कर्मचारी वर्ग सेवा विनियमावली-1995 में ऐसे किसी नियम का उल्लेख ही नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमावली में प्रावधान नहीं है, तो वर्षों से कर्मचारियों से ऐसे कार्य किस अधिकार और किस नियम के तहत कराए जा रहे हैं?
दस्तावेज के अनुसार—
- तकनीकी कर्मचारियों से राजस्व वसूली और फील्ड कार्य कराए जाने के संबंध में विभाग कोई स्पष्ट नियम नहीं दिखा सका।
- साप्ताहिक अवकाश निरस्त करने के आधार संबंधी नियमों का भी उल्लेख नहीं मिला।
- प्रतिकर अवकाश (C-Off) देने का प्रावधान तो बताया गया, लेकिन ERP/ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में उसे दर्ज करने की व्यवस्था तक नहीं है।
- विभाग ने स्वयं स्वीकार किया कि वर्तमान ERP प्रणाली में C-Off दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है।

नियम नहीं, फिर आदेश कैसे?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सेवा विनियमावली में कोई प्रावधान नहीं है, तो कर्मचारियों पर ऐसे आदेश थोपना सीधे-सीधे प्रशासनिक मनमानी और सेवा नियमों की अवहेलना माना जाएगा। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या विभाग ने अपनी सुविधा के लिए “समानांतर नियमावली” बना रखी है, जो केवल मौखिक आदेशों और दबाव के आधार पर लागू की जा रही है?
कर्मचारियों का आरोप
कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि विभाग में वर्षों से ऐसे कार्य कराए जा रहे हैं जिनका स्पष्ट वैधानिक आधार उपलब्ध नहीं है। यदि आरटीआई में विभाग नियम नहीं बता पा रहा, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बड़ा सवाल
- जब नियमावली में प्रावधान नहीं, तो कर्मचारियों से काम लेने का अधिकार किसने दिया?
- क्या विभाग सेवा विनियमों से नहीं, बल्कि अधिकारियों की व्यक्तिगत इच्छा से चल रहा है?
- क्या कर्मचारियों पर नियम-विरुद्ध कार्य थोपे जा रहे हैं?
यह आरटीआई जवाब विभागीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है और उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग को और मजबूत करता है।
🔴 “नियम किताबों में गायब, लेकिन कर्मचारियों पर लागू—आखिर किसके आदेश पर चल रहा है विभाग?”







