उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट और लापरवाही के दौर से गुजर रही है। भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग के बीच बिजली विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी अब जानलेवा साबित हो रही है। पिछले मात्र 31 दिनों में 26 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ हादसे हुए, जिनमें 15 कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 11 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हैं।
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा अपने ही आदेश दिनांक 15 मई 2017 का उल्लंघन करते हुए लगभग 25 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य से हटा दिया गया। इसके बाद विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी पैदा हो गई, जिसका सीधा असर फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार 11 केवी आउटगोइंग फीडरों पर एक गैंग में 1 लाइनमैन, 1 पेट्रोलमैन/कुशल श्रमिक और 2 अकुशल श्रमिक तैनात होने चाहिए, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई स्थानों पर केवल एक कर्मचारी के भरोसे पूरा फीडर चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं, अकुशल कर्मचारियों से एचटी/एलटी लाइनों, ट्रांसफार्मरों और ब्रेकरों पर खतरनाक कार्य कराया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पावर कार्पोरेशन प्रबंधन स्वयं अपने आदेश दिनांक 28 अगस्त 2025 में स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी स्थिति में अकुशल कर्मचारियों से बिजली लाइनों पर कार्य न कराया जाए, फिर भी अधिकारियों द्वारा दबाव बनाकर उनसे जान जोखिम में डालने वाला कार्य क्यों कराया जा रहा है?
सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों की कमी के कारण अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता लगातार दबाव बनाकर कम स्टाफ में अधिक कार्य करा रहे हैं। यही वजह है कि दुर्घटनाओं और मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी ओर, हादसों में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को आउटसोर्स कंपनियां उचित क्षतिपूर्ति देने में भी आनाकानी कर रही हैं।
बिजली कर्मचारियों की कमी का असर अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा। प्रदेशभर में उपभोक्ताओं को बिजली संकट, फॉल्ट, ट्रिपिंग और घंटों कटौती का सामना करना पड़ रहा है। विभाग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?
क्या बिजली व्यवस्था को बचाने वाले कर्मचारियों की जान इतनी सस्ती हो चुकी है कि नियमों को ताक पर रखकर उन्हें मौत के मुंह में धकेला जाता रहेगा?
यूपीपीसीएल मीडिया








