15 लाख की मशीनें चार महीने में फेल! बकेवर बिजलीघर में बड़ा खेल — पुरानी कबाड़ मशीनों पर चल रही 100 गाँवों की सप्लाई

नई मशीनें फेल, पुरानी पर टिकी सप्लाई — 15 लाख का सेट एक साल में ही हुआ खराब

इटावा/औरैया। बकेवर ग्रामीण बिजलीघर में करोड़ों की बिजली व्यवस्था संभालने वाली मशीनरी पर ऐसा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है कि ग्रामीण दंग हैं। बकेवर ग्रामीण बिजलीघर में पिछले वर्ष लगे करीब 15 लाख रुपये के आउटगोइंग–इनकमिंग मशीनों के नए सेट ने चार महीने के भीतर ही दम तोड़ दिया। मजबूरी में विभाग को पुरानी कंडम मशीनों से ही बिजली आपूर्ति चलानी पड़ रही है, जिससे तीन फीडरों — सराय जलाल, महेवा और पटिया — के लगभग 100 गाँवों की सप्लाई आए दिन ट्रिप होकर बाधित होती रहती है।

कंपनी गायब… विभाग खामोश… अंधेरे में गाँव

वर्ष 2024 के जून में लगाया गया मशीनों का यह सेट कुछ ही महीनों में खराब हो गया। बिजली विभाग ने कई बार शिकायत भेजी, लेकिन शिकायतों के बावजूद मशीन लगाने वाली कंपनी ने एक साल तक फोन भी नहीं उठाया!
करीब एक वर्ष बाद जब भारी दबाव के बाद मेकैनिक आए भी, तो मशीन ठीक करने में नाकाम लौट गए।

बार-बार ट्रिप, तीन फीडरों की सांसें उखड़ी

नए सेट की नाकामी के बाद विभाग को कबाड़ घोषित पुरानी मशीनें ही वापस चलानी पड़ रही हैं। सराय जलाल, महेवा और पटिया—इन तीनों फीडरों के करीब 100 गाँव लगातार बिजली कटौती से त्रस्त हैं। पुरानी मशीनें गर्म होकर बार-बार ट्रिप होती हैं, और बिजलीघर केवल “जुगाड़” पर चल रहा है।

बिजली विभाग की लापरवाही या मशीन सप्लायर की मिलीभगत?

नई मशीनें फेल, कंपनी मौन, विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं —
स्थानीय लोग खुलेआम सवाल उठा रहे हैं कि “क्या मशीन सप्लाई और इंस्टॉलेशन में भी भारी कमीशनखोरी हुई थी?”

SDO का बयान—कागज़ी आश्वासन या वाकई हल?

एसडीओ बकेवर संत कुमार वर्मा ने कहा— “कुछ पार्ट्स मंगवाए हैं। जल्द मशीन ठीक कराएंगे।” लेकिन ग्रामीणों का कहना है—
“एक साल में जब मशीन नहीं ठीक हुई, तो अब क्या होगा?”

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