मध्यांचल डिस्कॉम अंतर्गत 300 से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटर आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर…. जिम्मेदार कौन?

मध्यांचल डिस्कॉम ने मनमाने तरीके से अपने परिक्षेत्र में टाइपिंग कार्य करने हेतु एमएस ऑफिस एवं इंटरनेट का ज्ञान रखने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर की आपूर्ति हेतु मेसर्स मूलचंद ओम साई इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर कर बैक तिथि में मनमानी ढंग से लागू करने का कार्य कर रही है… और इस आशय पत्र से प्रभावित कंप्यूटर ऑपरेटरो की नौकरी से (जिनको हटाया जा रहा है) बिना किसी नोटिस/ सूचना के हटाए जा रहा है यह किसी भी दशा में कारपोरेट सेक्टर के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है… इस प्रकार का कार्य तो एक बनिया दुकानदार करता है कि किसी बात पर नाराज हो जाए.. और कह दिया जाए कि भाग यहां से, कल से न आना…. क्योंकि कॉरपोरेट सेक्टर में हटाने के एक महीना पहले नोटिस दी जाती है एक महीने का एडवांस सैलरी दी जाती है… लेकिन यहां पर नोटिस/ सैलरी देना तो दूर की बात है अभी तक पुराने कई माह के वेतन ही नहीं दिए गए…

आखिर क्या कारण है कि आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर होकर सभी स्थानों पर व्हाट्सप्प के माध्यम से उपलब्ध कराया गया... लेकिन उक्त आशय पत्र (एलओआई) पर परानी तिथि 01.04.2025 से कार्य प्रारंभ करने की बात कहीं गई... यह कैसे सम्भव है... हम तो अपना सिंर खुजला खुजला कर थक गये, लेकिन उक्त मध्यांचल डिस्कॉम का कारनामा (बैक तिथि में आशय पत्र (एलओआई) जारी करने सम्बन्धित) समझ नहीं पाया.... साथ में यह भी नहीं समझ पा रहा हूॅ कि डिस्कॉम अधीनस्थ अधिकारीयों के पास आशय पत्र (एलओआई) सम्बन्धित व्हाट्सप्प आने के पहले लगभग आाधा महीना से अधिक कार्य कर चुके आपरेटर के सैलरी का क्या होगा...? हमारी नजर में एक बहुत बड़ा घोटाला है, जिसकी हम आर्थिक अपराध शाखा से जॉच की मांग करते है।
आखिर क्या कारण है कि आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर होकर सभी स्थानों पर व्हाट्सप्प के माध्यम से उपलब्ध कराया गया… लेकिन उक्त आशय पत्र (एलओआई) पर परानी तिथि 01.04.2025 से कार्य प्रारंभ करने की बात कहीं गई… यह कैसे सम्भव है… हम तो अपना सिंर खुजला खुजला कर थक गये, लेकिन उक्त मध्यांचल डिस्कॉम का कारनामा (बैक तिथि में आशय पत्र (एलओआई) जारी करने सम्बन्धित) समझ नहीं पाया…. साथ में यह भी नहीं समझ पा रहा हूॅ कि डिस्कॉम अधीनस्थ अधिकारीयों के पास आशय पत्र (एलओआई) सम्बन्धित व्हाट्सप्प आने के पहले लगभग आाधा महीना से अधिक कार्य कर चुके आपरेटर के सैलरी का क्या होगा…? हमारी नजर में एक बहुत बड़ा घोटाला है, जिसकी हम आर्थिक अपराध शाखा से जॉच की मांग करते है। इतना तो तय है कि मघ्यांचल डिस्कॉम का मनमानी एवं ताना शाही फैसला से, लगभग 300 से अधिक के परिवार बर्बाद हो जायेगें… इसमें कोई दो राय नहीं।

एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रोजगार देने का वादा करते हैं वहीं दूसरी तरफ उन्हीं के अधीनस्थ विभाग रोजगार से वंचित करते हैं…

कल्पना कीजिए… यदि उक्त कंप्यूटर ऑपरेटर को रोजगार से वंचित कर दिया जाए वह भी इस उम्र में… तो वह कहां जाएंगे… उनको तो जीवन भर विभाग के काम करने के कारण विभागीय कार्य का ही अनुभव है…. वह अनुभव किसके काम आएगा…. हटाए जाने के कारण उनका वेतन नहीं मिलेगा तो उनकी किस्तें जाएगी….. उनके बच्चों का फीस किस पूरा होगा… अगर इंसानियत के नजर से इन सब चीजों के बारे में कल्पना करें तो आपके कल्पना मात्र से ही रोंगटे खड़े हो जाएंगे…. अब आप ही बताइए जिनके ऊपर इस प्रकार की जिम्मेदारियां रहे और उसको पूरा न कर पाए ऐसे कंप्यूटर ऑपरेटर के सामने क्या विकल्प बचेगा? यह अपने आप में अहम प्रश्न है.

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीनस्थ समस्त 19 जिलों में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्य कर रहे लगभग 300 से अधिक ऑपरेटर आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर इसलिए हो रहे हैं कि… मध्यांचल डिस्कॉम ने दिनांक 07.07.2024 के अनुपालन में एक निविदा संख्या जोकि 2024/बी/5080656/ऑपरेटर है.. के अनुपालन में अपने परिक्षेत्र के लिए दो वर्ष के लिए हिंदी एवं अंग्रेजी में टाइपिंग कार्य करने हेतु एमएस ऑफिस एवं इंटरनेट का ज्ञान रखने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर की आपूर्ति हेतु मेसर्स मूलचंद्र ओम साईं एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किया है… यह अनुबंध आगामी 2 वर्षों के लिए रु. चालीस करोड़ सत्तर लाख, एक हजार नौ सौ सात और आठ पैसा मात्र का किया है… खास बात यह है कि इस अनुबंध में कोई विस्तार लागू नहीं होगा। हालाँकि, मध्यांचल डिस्कॉम बिना कोई कारण बताए 30 दिन का नोटिस देकर अनुबंध समाप्त कर सकता है। आशय पत्र के अनुसार कार्य प्रारंभ की तिथि 01.04.2025 है….

👉 इस आशय पत्र के अनुसार सभी कम्प्यूटर ऑपरेटरों की योग्यता न्यूनतम स्नातक होगी, हिन्दी में न्यूनतम टाइपिंग 30 शब्द प्रति मिनट तथा अंग्रेजी में न्यूनतम 35 शब्द प्रति मिनट होगी, प्रमाण-पत्र (ईपीएफ स्लिप आदि) संबंधित फर्म द्वारा प्रदान किया जाएगा।

👉 उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल ने मध्यांचल डिस्कॉम अधीनस्थ क्षेत्र में कंप्यूटर ऑपरेटर की संख्या 1227 से घटा कर एलओआई की तिथि से प्रथम 3 माह के लिए 1000 व उसके उपरांत 900 कर दिया है…

👉 अध्यक्ष पावर कॉरपोरेशन की इस फैसले से में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर में हड़कंप मच गया… क्योंकि आशय पत्र (एलओआई) में अपनी ओर से कंप्यूटर ऑपरेटर की संख्या कर दी गई है… ऐसा क्यों और किसके सहमति पर किया गया यह समझ के परे है…

👉 यदि हम बात आशय पत्र (एलओआई) में निर्धारित कंप्यूटर ऑपरेटर की संख्या की करते हैं… तो यह संख्या किस मानक के आधार पर आकलन किया गया…

👉 आशय पत्र (एलओआई) में 10 जोन 40 कंप्यूटर ऑपरेटर…. यानी कि प्रत्येक जोन में 4, 29 सर्किल में 87 कंप्यूटर ऑपरेटर यानी कि प्रत्येक सर्किल में 3 कंप्यूटर ऑपरेटर, 105 डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजन में 315 कंप्यूटर…. यानी की प्रत्येक डिसटीब्यूशन डिविजन में 1 कंप्यूटर ऑपरेटर ऑपरेटर, 315 डिस्ट्रीब्यूशन सब डिवीजन में 315 कंप्यूटर ऑपरेटर…. यानी कि प्रत्येक डिस्ट्रीब्यूशन सबडिवीजन में 1 कंप्यूटर ऑपरेटर, 30 टेस्ट डिवीजन में 30 कंप्यूटर ऑपरेटर….यानी कि प्रत्येक टेस्ट डिविजन में 1 कंप्यूटर ऑपरेटर, 105 टेस्ट सबडिवीजन में 105 कंप्यूटर ऑपरेटर…. प्रतयेक टेस्ट सब डिविजन में 1 कंप्यूटर ऑपरेटर निर्धारण के अनुसार 892 कंप्यूटर ऑपरेटर होंगे…. इन सबके बीच खासियत यह होगी कि जहां-जहां पर 2019 के बाद कार्यालय सहायक जिनकी संख्या 229 है, तो कंप्यूटर ऑपरेटर की संख्या 892 से घटा दी जाएगी…

👉 इसके अतिरिक्त भंडार मंडल एवं कार्यशाला मंडल में 72, कार्य मंडल (सेकेंडरी वर्कशॉप) में 11 कंप्यूटर ऑपरेटर, जानपद (सिविल) क्षेत्र में पांच कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ-साथ DY CAO में 12 कंप्यूटर ऑपरेटर, एंटीथीप थाना में 38 कंप्यूटर ऑपरेटर व महान मध्यांचल डिस्कॉम में 110 कंप्यूटर ऑपरेटर रखने का आदेश दिया है…. इसके अतिरिक्त विद्युत परीक्षण खंड बदायूं, बाराबंकी, बरेली रूलर, अयोध्या, सुलतानपुर, उन्नाव व अकबरपुर में एक-एक अतिरिक्त कंप्यूटर ऑपरेटर रखने का प्रावधान किया है…

हैरानी का विषय यह है कि उपरोक्त स्थानो में वर्तमान में निर्धारित की गई संख्या से कई गुना ज्यादा कंप्यूटर ऑपरेटर विभाग में अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से लगभग 15 सालों से अधिक समय से अपनी अपनी सेवाएं दे रहे हैं… इनमें से कई ऐसे कंप्यूटर ऑपरेटर हैं जो पूरा जीवन विभाग के प्रति ही समर्पित कर दिया… जो आज जीवन के अंतिम पड़ाव पर है…. लगभग सभी कंप्यूटर ऑपरेटर जिसमें अधिकतर महिलाएं हैं.. शादी हो चुकी है… जिसके कारण घर के प्रति जिम्मेदारियां हैं… बच्चे हैं उनकी पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारियां है… और अधिकतर लोगों ने लोन भी ले रखा है… जिसकी बैंक किस्त भी जा रही है है… अध्यक्ष पावर कारपोरेशन के एक गलत फैसले के कारण सैकड़ो की संख्या में जिसकी अनुमानित संख्या 300 से अधिक है… आत्महत्या करने पर मजबूर है… आखिर उनकी गलती ही क्या थी.. विभाग के प्रति समर्पित होकर कार्य करना… क्या उनका यही कसूर था… जो इस प्रकार का कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है…

इतना तो तय है कि मघ्यांचल डिस्कॉम का मनमानी एवं ताना शाही फैसला से, लगभग 300 से अधिक के परिवार बर्बाद हो जायेगें... इसमें कोई दो राय नहीं।
इतना तो तय है कि मघ्यांचल डिस्कॉम का मनमानी एवं ताना शाही फैसला से, लगभग 300 से अधिक के परिवार बर्बाद हो जायेगें… इसमें कोई दो राय नहीं।

एक गलत फैसले के कारण कंप्यूटर ऑपरेटरो की जो हालत खराब है….वह तो है ही है.. इन सबके बीच उनसे काम लेने वाले अधिकारियों की हालत खराब है कि वह यह निर्णय नहीं कर पा रहे हैं कि किसको रखें और किसको हटाए… क्योंकि उनके लिए तो सभी कंप्यूटर ऑपरेटर महत्वपूर्ण है… सभी की अपनी जिम्मेदारियां रही है और सभी लोग अपनी जिम्मेदारियां को कुशलतापूर्वक निर्वाह भी कर रहे थे… इसके साथ बाबुओं भी अपनी जिम्मेदारियां का अच्छी तरह पालन कर रहे थे…

👉 आखिर ऐसी कौन सी आफत आ गई थी कि कि मध्यांचल डिस्कॉम को इस प्रकार के फैसले लेने पड़े?

👉 आखिर ऐसी कौन सी आफत आ गई थी कि बैक तिथि में आशय पत्र जारी करने की आवश्यकता पड़ गई?

👉 आखिर ऐसी कौन सी आफत आ गई थी कि जिस जिस अधिकारियों को उक्त कंप्यूटर ऑपरेटरो से काम लेना था… उनसे विचार विमर्श नहीं किया गया?

👉 आखिर इस प्रकार के मनमानी तरीके से लिए गए फैसले से जो काम प्रभावित होगा… उसका जिम्मेदार कौन होगा?– कहीं ट्रांसफार्मर फूकने की जिम्मेदारी अधिकारियों के ऊपर डालने की तरह… कार्य न कर पाने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर डालने की तो नहीं होगी?

👉 आखिर इस प्रकार के मनमानी तरीके से लिए गए फैसले से कंप्यूटर ऑपरेटरो के परिवार जो तबाह होंगे…उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?… यदि इस तबाही का जिम्मेदार विभाग अपने ऊपर नहीं लेता है और संबंधित कार्यरत एजेंसी के ऊपर डालता है… तो क्या उक्त कॉरपोरेट एजेंसी ने कॉर्पोरेट नियम का पालन किया है… क्या निकालने का एक महीना पूर्व की नोटिस दी है? क्या निकालने की पूर्व 1 महीने का एडवांस सैलरी दी है…. एडवांस सैलरी तो छोड़ दिए महोदय… अभी कई माह की सैलरी तक नहीं दी है।

👉 अभी संबंधित अधिकारी यही तय नहीं कर पा रहे हैं कि हम किसको रखें और किसको हटाए क्योंकि उनके लिए तो सभी कंप्यूटर ऑपरेटर महत्वपूर्ण हैं… उन सभी कंप्यूटर ऑपरेटर के रहते भी निर्धारित समय में सभी काम नहीं हो पाते है… गलत तरीके से हो वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अध्यक्ष पावर कॉरपोरेशन अथवा वाणिज्य निदेशक द्वारा पल-पल जो जानकारी मांगी जाती है यही ऑपरेटर उनको उपलब्ध करते हैं।

अध्यक्ष पावर कॉरपोरेशन अथवा मध्यांचल डिस्काउंट के अधिकारी कभी यह प्रयास नहीं किया कि उक्त कंप्यूटर ऑपरेटर का जो वेतन समय पर नहीं मिल रहा है उसको दिलाया जा सके… बल्कि यह प्रयास किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के रोजगार उपलब्ध कराए जाने की योजना दर किनार करते हुए रोजगार छीनने का प्रयास किया जाए।

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