विधायक निधि से लगी हाईमास्ट लाइट अब तक नहीं हुई चालू
ट्रांसफार्मर बगल में फिर भी विभाग नहीं दे सका कनेक्शन
पट्टी (प्रतापगढ़) | UPPCL MEDIA
सरकारी योजनाओं की सुस्ती और विभागीय लापरवाही का एक और उदाहरण प्रतापगढ़ के पट्टी विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है। जगदीशगढ़ चौराहे पर ₹5.50 लाख की लागत से लगाई गई हाईमास्ट लाइट पिछले तीन वर्षों से केवल लोहे का ढांचा बनकर खड़ी है, क्योंकि आज तक उसे बिजली का कनेक्शन नहीं मिल सका।
सबसे हैरानी की बात यह है कि हाईमास्ट के ठीक बगल में 25 KVA का ट्रांसफार्मर मौजूद है, लेकिन बिजली विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्था की फाइलें अब तक आगे नहीं बढ़ सकीं। नतीजा यह है कि लाखों रुपये की सरकारी धनराशि खर्च होने के बावजूद चौराहा आज भी अंधेरे में डूबा हुआ है।
सावन मेले से पहले बढ़ी चिंता
30 जुलाई से शुरू होने वाले सावन मेले के दौरान हजारों कांवरिया और श्रद्धालु इसी मार्ग से गुजरेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं, जिससे महिलाओं, श्रद्धालुओं और राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप- सिर्फ उद्घाटन, सुविधा नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक हाईमास्ट लगाने की मांग की गई थी। मांग पूरी भी हुई, लेकिन बिना बिजली कनेक्शन के हाईमास्ट लगाकर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली।
लोगों का सवाल है कि यदि कनेक्शन ही नहीं देना था तो लाखों रुपये खर्च कर हाईमास्ट लगाने का क्या औचित्य था?
जेई ने क्या कहा?
सोनाही विद्युत उपकेंद्र के जेई नीरज कुमार के अनुसार, जिस विभाग ने हाईमास्ट का कार्य कराया है, उसके आवेदन और सर्वे के बाद ही बिजली कनेक्शन जारी किया जा सकता है।
ग्रामीणों की मांग
रामचंद्र पांडे, विनय सिंह, दिनेश सरोज, सोनू पांडे, सुशील मिश्र, चेतन सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य कल्लू मौर्य, राम आसरे सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि सावन मेले से पहले तत्काल बिजली कनेक्शन देकर हाईमास्ट लाइट चालू कराई जाए।
UPPCL MEDIA का सवाल
- क्या ₹5.50 लाख की सरकारी परियोजना केवल फोटो और उद्घाटन तक सीमित थी?
- जब ट्रांसफार्मर बगल में है, तो तीन साल से कनेक्शन क्यों नहीं मिला?
- अगर सावन मेले के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
- क्या विभागीय लापरवाही पर किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?
जनता जानना चाहती है—सरकारी धन खर्च होने के बाद भी सुविधा कब मिलेगी?








