बिजली विभाग की लापरवाही ने ली चाट विक्रेता की जान, अदालत ने सुनाया ₹29.95 लाख मुआवजे का फैसला

अलीगढ़। UPPCL MEDIA। खैर रोड पर झूलते बिजली के तारों की वजह से चाट विक्रेता की दर्दनाक मौत के मामले में बिजली विभाग की लापरवाही आखिरकार अदालत में साबित हो गई। स्थायी लोक अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि विभाग समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई करता तो एक परिवार का कमाने वाला सदस्य आज जीवित होता।

अदालत ने विद्युत नगरीय खंड-तृतीय को मृतक के परिजनों को ₹29.95 लाख का मुआवजा 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। साथ ही ₹10,000 वाद व्यय भी अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि यह फैसला महज 9 महीने के भीतर सुनाया गया।

क्या था मामला?

जलालपुर निवासी शकुंतला देवी, उनके पुत्र ललित, कपिल और पुत्री पिंकी ने 30 सितंबर 2025 को स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनके पति ओमवीर सिंह खैर रोड पर चाट-गोलगप्पे का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे।

18 जुलाई 2025 को दोपहर करीब 3:30 बजे सड़क पर झूल रहे बिजली के तारों की चपेट में आने से ओमवीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि स्थानीय लोगों ने पहले भी कई बार झूलते तारों की शिकायत की थी, लेकिन बिजली विभाग ने उन्हें ठीक कराने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की।

अदालत में विभागों ने एक-दूसरे पर डाली जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान बिजली विभाग ने दलील दी कि नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने के कार्य के दौरान तार टूटे थे, जबकि नगर निगम ने अपनी किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार कर दिया। दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।

लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर स्थायी लोक अदालत ने बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार माना और मुआवजे का आदेश पारित किया।

पीड़ित परिवार को मिला न्याय

स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष शंकर लाल, वरिष्ठ सदस्य सत्यदेव एवं सदस्य आरती की पीठ ने मृतक की ₹20,000 प्रतिमाह आय के आधार पर मुआवजे की गणना करते हुए कुल ₹29.95 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया।

UPPCL MEDIA सवाल उठाता है…

  • जब झूलते तारों की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • हर हादसे के बाद ही जिम्मेदारी तय क्यों होती है?
  • क्या बिजली विभाग ऐसे मामलों से कोई सबक लेगा या अगला मुआवजा किसी और परिवार को मिलेगा?

बिजली व्यवस्था में लापरवाही केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ है। समय पर रखरखाव और जवाबदेही ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।

  • UPPCL MEDIA

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